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कलेक्टर परिसर में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का शिकंजा,ट्रांसफर के बाद भी नहीं थमी लालच की कहानी:अजाक विभाग के राकेश राठौर और हरीश चौहान एक लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार

Mahendra Upadhyay
4 Min Read
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। आदिम जाति कल्याण विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गुरुवार को लोकायुक्त संगठन उज्जैन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला संयोजक राकेश राठौर और उत्कृष्ट बालक छात्रावास नीमच के अधीक्षक हरीश चौहान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह है कि जिला संयोजक राकेश राठौर का हाल ही में स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन विभाग से विदाई से पहले ही रिश्वतखोरी का यह मामला सामने आने से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।सागर मंथन लोकायुक्त की यह कार्रवाई कलेक्टर कार्यालय परिसर में संचालित आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालय से जुड़ी है। जिस परिसर में जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं,वहीं एक लाख रुपये की रिश्वत का लेन-देन पकड़े जाने से सरकारी कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।लोकायुक्त डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल ने सागर मंथन को बताया कि शिकायतकर्ता कुर्दुला एक्का, अधीक्षिका, जूनियर कन्या छात्रावास कुकड़ेश्वर ने शिकायत दर्ज कराई थी। सागर मंथन शिकायत ने आरोप लगाया गया था कि छात्रावास संचालन में अनियमितताओं के चलते कलेक्टर ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच में सहयोग करने तथा उनका लंबित वेतन जारी कराने के नाम पर जिला संयोजक राकेश राठौर और छात्रावास अधीक्षक हरीश चौहान द्वारा 1 लाख 25 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी।शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन किया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की गई। तय रणनीति के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत की राशि आरोपियों तक पहुंचाई गई। जैसे ही अधिकारि ने राशि स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।सागर मंथन कार्रवाई के दौरान एक लाख रुपये की रिश्वत राशि हरीश चौहान की पैंट की दाहिनी जेब से बरामद की गई।इसके बाद आरोपि के हाथ धुलवाने सहित अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर मौके पर पंचनामा तैयार किया गया। लोकायुक्त अधिकारियों ने रिश्वत से जुड़े आवश्यक साक्ष्य भी जब्त किए हैं।लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा-7 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत सागर मंथन प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्थानांतरण के बाद विभाग छोड़ने की तैयारी कर रहे अधिकारी का नाम इतनी बड़ी रिश्वतखोरी की कार्रवाई में सामने आया है।लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों में भी हलचल देखी जा रही है। प्रशासनिक गलियारों में दिनभर इस ट्रैप की चर्चा होती रही और इसे जिले की हालिया सबसे बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।ट्रैप दल में डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल,निरीक्षक हीना डावर, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत,आरक्षक उमेश जाटव,आरक्षक श्याम शर्मा, आरक्षक मोहम्मद इसरार, आरक्षक संजीव कुमारिया तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अंजली पुरानिया शामिल रहे।

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