नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) के नवासे हजरत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और शोहदाए कर्बला की अज़ीम शहादत की याद में शुक्रवार को नीमच कैंट, छावनी और बघाना क्षेत्र में यौमे आशूरा पूरे अदब, एहतराम और अकीदत के साथ मनाया गया। शहर में मातमी माहौल के बीच छोटे-बड़े करीब 60 ताजियों का जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस के दौरान “या हुसैन”, “या अली” और मातमी नौहों की सदाओं से पूरा शहर गूंज उठा।अखाड़ा के उस्ताद मुन्ना सम्राट,अबरार भाई उर्फ ओबरी उस्ताद एवं पार्षद इकबाल कुरैशी ने संयुक्त रूप से बताया कि सुबह करीब 8 बजे विभिन्न मोहल्लों से ताजिए अपने-अपने मुकाम से रवाना हुए। जुलूस पटेल चाल, फ्रूट मंडी, टैगोर मार्ग, फोर-जीरो, पुस्तक बाजार, जाजू बिल्डिंग, नया बाजार और घंटाघर सहित प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। रास्तेभर अकीदतमंदों ने फूल, इत्र, लोबान और नारियल पेश कर ताजियों की जियारत की तथा अपनी मन्नतें पूरी होने पर लोट लगाकर नजराना अदा किया। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश की।बैंड की मातमी धुनों पर “हैदर के चरणों का धौवन अमृत से अनमोल, हैदर कलंदर बोल रे बोल”, “अस्सलाम या हुसैन”, “या हुसैन इब्ने हैदर पे लाखों सलाम”, “खुदा की राह में सब कुछ लुटा दिया तुमने, हुसैन मर के भी जीना सिखा दिया तुमने”, “कत्ले हुसैन अस्ल में मरग-ए-यज़ीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद” जैसे नौहे और कलाम पढ़े गए। अकीदतमंद सीना-ज़नी करते हुए इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर अश्कबार नजर आए।
यौमे आशूरा इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। इसी दिन कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने अपने 72 जानिसार साथियों के साथ दीन-ए-इस्लाम, इंसाफ और हक की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी यह अज़ीम कुर्बानी आज भी इंसानियत, सब्र, सच्चाई और जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने का पैगाम देती है।
मोहर्रम के मौके पर शहर में जगह-जगह शरबत, हलीम और तबर्रुक का एहतमाम किया गया। दोपहर करीब 2 बजे ताजिए अपने-अपने इमामबाड़ों में पहुंचे। इसके बाद शाम करीब 4 बजे सभी ताजिए दोबारा अपने मुकाम से उठकर टैगोर मार्ग पर एक स्थान पर एकत्र हुए। इस नजारे को देखने के लिए चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, नयागांव, जावद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।देर रात ताजियों का कारवां झांझरवाड़ा स्थित कर्बला की ओर रवाना हुआ,जहां धार्मिक रस्मों के साथ ताजियों को ठंडा किया गया। इस दौरान अड्डे, बड़ी मंडी इब्राहिम, कालीगिरी अखाड़ा, अब्बासिया, बोहरा समाज, रिसाला दरगाह सहित विभिन्न अखाड़ों और अंजुमनों के ताजिए शामिल रहे। अखाड़ों ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का भी प्रदर्शन किया।मोहर्रम के पूरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। वरिष्ठ अधिकारी लगातार संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण करते रहे तथा प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों और अतिरिक्त पुलिस बल के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी गई।
*शनिवार नीमच सिटी में निकलेगा ताजियों का जुलूस*
नीमच सिटी क्षेत्र में शनिवार को मोहर्रम के अवसर पर करीब 20 छोटे-बड़े ताजियों का जुलूस निकाला जाएगा। ताजिए अपने-अपने इमामबाड़ों से रवाना होकर नया बाजार सहित प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। शाम करीब 5 बजे सभी ताजिए एकत्रित होकर पारंपरिक रस्मों के साथ देर रात कर्बला में ठंडे किए जाएंगे। प्रशासन ने शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।







