नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। भाटखेड़ा फंटे से सुवाखेड़ा फंटे डूंगलावदा तक चल रहे सिटी फोरलेन सड़क एवं पुलिया चौड़ीकरण कार्य के बीच शहर की दो शताब्दियों पुरानी धार्मिक आस्था का केंद्र बने श्री माधोपुरी बालाजी मंदिर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मंदिर को संभावित नुकसान की आशंका के चलते सर्व हिन्दु समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित कर मंदिर की दिशा में किए जा रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने तथा सड़क का विस्तार दूसरी ओर से किए जाने की मांग उठाई है।समाजजनों का कहना है कि नीमच बस स्टैंड से महू रोड स्थित पहली पुलिया के समीप स्थापित श्री माधोपुरी बालाजी मंदिर लगभग 200 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि चौड़ीकरण कार्य के कारण मंदिर परिसर प्रभावित होता है तो यह केवल एक भवन का नुकसान नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं और धार्मिक आस्था पर आघात होगा।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर में केवल श्री माधोपुरी बालाजी मंदिर ही नहीं, बल्कि भगवान शिव, माता संतोषी, श्री गणेशजी एवं साईं बाबा के मंदिर भी स्थित हैं। सर्व हिन्दु समाज का आरोप है कि वर्तमान निर्माण गतिविधियों से मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने की आशंका है, जिससे इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में विधायक दिलीपसिंह परिहार एवं जिला प्रशासन को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है। उस दौरान यह आश्वासन दिया गया था कि मंदिर की भूमि और संरचना को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है।सर्व हिन्दु समाज ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर की ओर होने वाले निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए तथा सड़क एवं पुलिया का विस्तार दूसरी दिशा में किया जाए, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। साथ ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सनातन आस्था के इस ऐतिहासिक केंद्र को संरक्षित रखने की मांग की गई है।समाजजनों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास की कीमत धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।







