नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सोमवार को नीमच दौरे के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया,जब कांग्रेस नेताओं को मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने की जानकारी सामने आई।इस खबर के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांधी भवन स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पहुंचने लगे, जहां विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई गई।जानकारी के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाकर विरोध जताने की तैयारी की। वहीं कुछ कार्यकर्ताओं के बीच मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने को लेकर भी चर्चा होती रही, हालांकि इस संबंध में जिला कांग्रेस संगठन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।गांधी भवन में लगातार बढ़ती कार्यकर्ताओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पहले से ही सतर्क हो गई थी। संभावित विरोध प्रदर्शन को लेकर गांधी भवन और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मौके पर सीएसपी, दो थाना प्रभारियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन और खुफिया विभाग की टीमें पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए थीं ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।जैसे ही कांग्रेस कार्यालय पर विरोध तेज होना शुरू हुआ,पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की तैयारी की सूचना मिलते ही पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरबंद करना शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “मुख्यमंत्री डरता है, पुलिस को आगे करता है” तथा “मुख्यमंत्री हाय-हाय” जैसे नारे लगाए। कुछ देर तक पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सभी को पुलिस वाहनों में बैठाकर थाने ले जाया गया। वहीं शहर के 40 नंबर क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की तैयारी की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं के हाथों से काले झंडे जब्त कर लिए तथा वहां मौजूद कई कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लेकर पुलिस वाहन से रवाना किया।मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हुए इस घटनाक्रम को लेकर पूरे शहर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर चलता रहा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।







