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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय : कांग्रेस,निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा

Mahendra Upadhyay
4 Min Read
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर केंद्र और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओं ने इसे केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था,निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा आघात बताया।पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है। उन्होंने कहा कि जिन आधारों और व्याख्याओं के आधार पर नामांकन खारिज किया गया है, उससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।बाहेती ने कहा कि जिस निजी परिवाद (प्राइवेट कंप्लेंट) का हवाला देकर नामांकन निरस्त किया गया, उसमें मीनाक्षी नटराजन को अभियुक्त नहीं बल्कि प्रतिवादी के रूप में दर्शाया गया है। अभियुक्त और प्रतिवादी की कानूनी स्थिति अलग-अलग होती है, लेकिन दोनों को समान मानकर की गई कार्रवाई गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करती है।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए तथा फॉर्म-26 का उद्देश्य केवल उन मामलों की जानकारी प्राप्त करना है, जिनमें उम्मीदवार के विरुद्ध विधिवत आपराधिक कार्रवाई चल रही हो। कांग्रेस का मत है कि जिस आधार को नामांकन निरस्त करने का कारण बनाया गया, वह कानून की भावना और उसकी सही व्याख्या के अनुरूप नहीं है।कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में किसी भी उम्मीदवार का नामांकन ऐसे तकनीकी और विवादित आधारों पर निरस्त किया जाने लगा,जिनकी स्पष्ट अपेक्षा नामांकन पत्र में नहीं है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया में अनिश्चितता और मनमानी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा स्वतंत्र,प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष चुनावों में निहित है। यदि विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को विवादित आधारों पर चुनावी मैदान से बाहर किया जाएगा तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
प्रेस नोट में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कहा गया है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है,बल्कि सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को समान अवसर,निष्पक्ष व्यवहार तथा कानून के समक्ष समान संरक्षण मिलना भी उतना ही आवश्यक है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या चुनावी संस्थाएं लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेंगी या फिर विपक्ष की आवाज को सीमित करने का माध्यम बनेंगी।तरुण बाहेती ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन जैसी साफ-सुथरी छवि, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसेवा के लिए समर्पित नेता को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संविधान की भावना, निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।पत्रकार वार्ता में बृजेश मित्तल,मनमोहन सिंह ‘मन्नू’बना,बृजेश सक्सेना, आशा सांभर सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान तरुण बाहेती ने भाजपा नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की सलाह भी दी।कांग्रेस ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि संविधान,लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की रक्षा के लिए पार्टी का संघर्ष आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

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