नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।भोपाल से मंदसौर तक प्रस्तावित 258 किलोमीटर लंबे 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाहेती ने आरोप लगाया कि तीनों विधायकों की निष्क्रियता और सांसदों का “मंदसौर प्रेम” लगातार नीमच जिले से विकास की सौगातें छीनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि गंभीर प्रयास करते तो यह महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना मंदसौर से आगे बढ़कर नीमच और राजस्थान सीमा तक पहुंच सकती थी, लेकिन जिले की जनता को एक बार फिर विकास की मुख्यधारा से दूर कर दिया गया।
बाहेती ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि 26 मई 2026 को अनुबंध क्रमांक 1100/2026 के तहत भोपाल-मंदसौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए आधिकारिक अनुबंध हो चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 6 करोड़ रुपए की लागत से डीपीआर तैयार की जाएगी और परियोजना के लिए अलाइनमेंट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।बाहेती ने कहा कि पहले यह सड़क परियोजना भोपाल से नयागांव बॉर्डर तक प्रस्तावित थी, जिससे नीमच को सीधे राजधानी से आधुनिक फोरलेन कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब इसे केवल मंदसौर तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता, सांसद बंशीलाल गुर्जर, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार, जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा तथा मनासा विधायक माधव मारू ने इस मुद्दे पर कोई प्रभावी पहल नहीं की।उन्होंने कहा कि जिले के जनप्रतिनिधियों को परियोजना की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद किसी ने भी नीमच को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए सरकार के समक्ष ठोस मांग नहीं रखी। परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख आबादी वाला जिला एक बड़े विकास अवसर से वंचित हो गया। बाहेती ने आरोप लगाया कि सांसद सुधीर गुप्ता का झुकाव लगातार मंदसौर की ओर रहा है, जबकि नीमच के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नीमच प्रदेश का महत्वपूर्ण कृषि, अफीम और औद्योगिक जिला है। यहां सीमेंट उद्योग, कृषि व्यापार और अंतरराज्यीय वाणिज्य की अपार संभावनाएं हैं। यदि यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर नीमच और राजस्थान सीमा तक विस्तारित होता तो चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा और उदयपुर क्षेत्र के व्यापारियों को भी सीधा लाभ मिलता। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होते, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह अवसर हाथ से निकलता दिखाई दे रहा है।बाहेती ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश सरकार इतने बड़े बजट की परियोजना पर काम कर रही थी, तब जिले के तीनों विधायक और दोनों सांसद आखिर क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के पास जिले में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व होने के बावजूद नीमच को बार-बार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि जिले के साथ अन्याय है।उन्होंने जिले के सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। बाहेती ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे जिले के भविष्य की लड़ाई है। जिस तरह मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर नीमच की जनता ने एकजुट होकर संघर्ष किया था, उसी तरह इस सड़क परियोजना के लिए भी जनआंदोलन खड़ा करना होगा।कांग्रेस अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभी आवाज नहीं उठाई गई तो परियोजना का अंतिम स्वरूप तय हो जाएगा और भविष्य में नीमच को इससे जोड़ना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और जिले के हितों की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगेगी।जनता अपने वोट और टैक्स का हिसाब मांगने का अधिकार रखती है। यदि नीमच के साथ इसी तरह भेदभाव जारी रहा तो कांग्रेस व्यापक जनआंदोलन चलाएगी और जिले के हितों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।
भोपाल-मंदसौर ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर से नीमच बाहर, तीनों विधायकों की निष्क्रियता और सांसदों का ‘मंदसौर प्रेम’नीमच से छीन रहा सौगातें:कांग्रेस ने बताया जिले के साथ बड़ी साजिश







