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चौथे दिन भी डटे एनएचएम संविदाकर्मी,8 जून को मुख्यमंत्री निवास घेराव की चेतावनी

Mahendra Upadhyay
3 Min Read
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रही। अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत कर्मचारियों ने शासन की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो 8 जून को प्रदेशभर के संविदाकर्मी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।जिला चिकित्सालय परिसर स्थित ट्रॉमा सेंटर के समीप धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि आंदोलन के चार दिन बीत जाने के बावजूद उनकी समस्याओं को सुनने कोई जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करने के बजाय उन्हें दबाव में लेने और डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं।आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों ने चौथे दिन सोशल मीडिया अभियान चलाकर अपनी मांगों को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया। इससे पहले हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने अप्रेजल संबंधी आदेशों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया था। दूसरे दिन आमजन की सेवा करते हुए प्याऊ लगाकर पेयजल वितरण किया गया, जबकि तीसरे दिन सुंदरकांड पाठ का आयोजन कर शासन-प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की गई।हड़ताल का असर अब जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, नियमित टीकाकरण, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), दवा वितरण तथा अन्य कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हैं।संविदाकर्मियों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में की गई नियमितीकरण की घोषणा को लागू करना, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) एवं स्वास्थ्य बीमा का लाभ देना, वार्षिक वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, वेतन विसंगतियों का निराकरण, नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश सुविधा तथा समान कार्य के लिए समान वेतन और सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनिल कुमार डुगरवाल एवं जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार शर्मा ने कहा कि एनएचएम के हजारों संविदा कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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