नीमच।महेन्द्र उपाध्याय।हजरत शहाबुद्दीन बाबा के 131वें राष्ट्रीय कौमी एकता उर्स के अवसर पर नीमच सिटी रोड स्थित दरगाह परिसर में चार दिवसीय आयोजन बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। 21 से 24 अप्रैल तक चल रहे इस उर्स में देशभर से आए जायरीन आस्था के साथ शिरकत कर रहे हैं। उर्स के तीसरे दिन 22 अप्रैल को आयोजित मेहफिल-ए-शमां में सूफियाना कव्वाली ने समां बांध दिया।दरगाह कमेटी के सदर मुन्ना दुर्रानी के अनुसार, रात 9 बजे नमाज-ए-ईशा के बाद शुरू हुई कव्वाली महफिल में मशहूर कव्वाल इकबाल रमजान फरीदी, जुबेर साबरी और स्थानीय कलाकार हाजी अकरम उमर कव्वाल ने अपने कलामों से महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। “मेहबूब की महफिल को मेहबूब सजाते हैं…”, “आते हैं वही जिनको सरकार बुलाते हैं…” और “गरीबी इसलिए दामन में लेकर बैठा हूं, सुना है तुझको गरीबों से प्यार है ख्वाजा…” जैसे सूफियाना कलामों ने उपस्थित जायरीन को भावविभोर कर दिया।महफिल में “आका तेरी अदा भी अजब बेमिसाल है…”, “तू मेरा करार है ख्वाजा…”, “मौला अली-अली मौला…” जैसे कलामों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही। कव्वालों की प्रस्तुति पर जायरीन झूम उठे और दरगाह परिसर पूरी तरह इबादत और सूफियाना माहौल में डूब गया।इस दौरान बाबा के आस्ताने पर जायरीन ने चादर शरीफ और अकीदत के फूल पेश कर अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। शाम को तबर्रुक तक्सीम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। दरगाह परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया, जो आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।उर्स के आयोजन में खजांची जाहिद कादरी, हमीद कादरी, जाकिर कुरैशी, आरिफ शेख, इम्तियाज भाई, शाहरूख भाई सहित कई खिदमतगुजार सक्रिय रूप से जुड़े रहे। इसके अलावा बाहर से आए सूफी संतों और मेहमानों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।चार दिवसीय इस उर्स में धार्मिक सौहार्द, भाईचारा और कौमी एकता की मिसाल देखने को मिल रही है, जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर सूफी परंपरा की इस विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।







