नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। बाणंदा बांध परियोजना से प्रभावित ग्राम झुपड़िया के आदिवासी परिवारों ने मंगलवार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास, आवासीय पट्टा भूमि एवं उचित मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अन्यत्र स्थान पर कॉलोनी विकसित कर रहने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए अपनी समस्याएं सामने रखीं।ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि वे आदिवासी भील समाज से हैं और लंबे समय से ग्राम झुपड़िया में निवास करते आ रहे हैं। अधिकांश परिवार मजदूरी एवं कृषि कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाणंदा बांध परियोजना के कारण उनका गांव प्रभावित क्षेत्र में आ गया है, जिससे भविष्य में उनके सामने विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे कई बार तहसीलदार एवं कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर चुके हैं,लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार का न्याय या ठोस आश्वासन नहीं मिला। आवेदन में कहा गया कि पूर्व में प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को बांध क्षेत्र से दूर कॉलोनी बनाकर मकान उपलब्ध कराने तथा 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को अलग परिवार मानते हुए शासन की योजनाओं का लाभ और मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्राम पंचायत बाणंदा के अन्य प्रभावित निवासियों को जो सुविधाएं और लाभ दिए गए हैं, वही सुविधाएं झुपड़िया के आदिवासी परिवारों को भी मिलनी चाहिए, क्योंकि वे भी उसी पंचायत क्षेत्र के निवासी हैं।ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में बांध का पानी गांव तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है, जिससे आवागमन और निवास को लेकर खतरा बना रहता है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि शासन की योजना अनुसार सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए तथा सुरक्षित स्थान पर कॉलोनी बनाकर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ज्ञापन की प्रतिलिपि जल संसाधन विभाग एवं अनुविभागीय अधिकारी जावद को भी प्रेषित की गई है।







