नीमच। महेंद्र उपाध्याय।जीरन क्षेत्र ने गुरुवार को अपने एक वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सीआरपीएफ नीमच में पदस्थ जांबाज जवान संजय पाटीदार (सगवारिया) का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटा हुआ उनके गांव पहुंचा, तो पूरा वातावरण गम और गर्व के भाव से भर उठा। गांव की गलियों में जहां एक ओर मातम पसरा था, वहीं दूसरी ओर “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, संजय तेरा नाम रहेगा” जैसे नारों से आसमान गूंज उठा। महज 35 वर्ष की उम्र में देश सेवा करते हुए संजय का इस तरह असमय चले जाना पूरे क्षेत्र के लिए गहरा आघात बन गया।सुबह से ही जीरन के गणपति मंदिर चौराहे और लोहिया नगर स्थित उनके निवास के बाहर हजारों लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी। जैसे ही सीआरपीएफ के वाहन से तिरंगे में लिपटा जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गई। मां-बहनों का विलाप, पिता की कांपती आंखें और मासूम बेटे की खामोशी हर किसी का दिल झकझोर रही थी। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर व्यक्ति अपने वीर बेटे की अंतिम झलक पाने उमड़ पड़ा।सीआरपीएफ के अधिकारी रामरस मीणा के नेतृत्व में पहुंचे सैन्य दल ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की। जवानों ने अनुशासित पंक्तियों में खड़े होकर अपने साथी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। इस दौरान माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा। सैन्य अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर देश की ओर से वीर जवान को अंतिम सलामी दी।इसके बाद गांव में संजय पाटीदार की भव्य शव यात्रा निकाली गई। देशभक्ति गीतों की गूंज के साथ हजारों ग्रामीणों का जनसैलाब अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। “ऐ मेरे वतन के लोगों” और “संदेशे आते हैं” जैसे गीतों ने माहौल को और अधिक मार्मिक बना दिया। गांव की हर गली से लोग अपने वीर लाल को श्रद्धा सुमन अर्पित करने बाहर निकल आए। कई लोगों की आंखों में गर्व था कि उनके गांव का बेटा देश की सेवा करते हुए सम्मान के साथ विदा हो रहा है।अंतिम यात्रा मुक्तिधाम पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पिता प्रेमनारायण पाटीदार, काका सत्यनारायण, छोटे भाई कपिल और मासूम पुत्र वैदिक ने नम आंखों से अपने प्रिय संजय को मुखाग्नि दी। जैसे ही चिता की लपटें उठीं, वहां मौजूद हजारों लोगों ने एक स्वर में “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहे” के नारे लगाए।जीरन का यह वीर सपूत अब पंचतत्व में विलीन हो चुका है, लेकिन उसकी देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा। संजय पाटीदार की अंतिम यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत का सैनिक केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव होता है।







