नीमच। महेंद्र उपाध्याय। आशा एवं आशा सुपरवाइजर कर्मचारी महासंघ द्वारा मुख्यमंत्री के नाम एक 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन कलेक्टर प्रतिनिधि को सौंपकर लंबित समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की गई। महासंघ ने बताया कि 29 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा सुपरवाइजरों के लिए प्रति वर्ष एक हजार रुपये मानदेय वृद्धि सहित कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन आज तक उनका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाया है।ज्ञापन में बताया गया कि आशा कार्यकर्ताओं को केंद्र सरकार से 2 हजार रुपये, राज्य शासन से 4 हजार रुपये तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से विभिन्न प्रोत्साहन राशि प्राप्त होती है। इसके बावजूद जनवरी 2026 से जून 2026 तक की प्रोत्साहन राशि का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। कई बार पांच-पांच माह तक भुगतान लंबित रहने से आशा कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बजट की कमी, सॉफ्टवेयर समस्या अथवा भुगतान हो जाने जैसे विभिन्न कारण बताकर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।महासंघ ने कहा कि भीषण गर्मी में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली महिला कर्मियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार चिंताजनक है। समय पर भुगतान नहीं होने से उनके परिवारों के भरण-पोषण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।ज्ञापन में आशा वर्कर्स को न्यूनतम 18 हजार रुपये तथा आशा सहयोगिनी को 24 हजार रुपये मासिक वेतन, ईपीएफ, ईएसआई एवं पेंशन सुविधा, कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु पर 5 लाख रुपये मुआवजा, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये एकमुश्त राशि, योग्य आशा कार्यकर्ताओं को एएनएम पद पर पदोन्नति, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, वर्ष में दो बार गणवेश उपलब्ध कराने, अस्पतालों में विश्राम स्थल की व्यवस्था, यात्रा भत्ता, प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना में आयु सीमा 55 वर्ष तक बढ़ाने, 5जी मोबाइल अथवा टैबलेट उपलब्ध कराने तथा मातृत्व अवकाश की सुविधा सहित कुल 12 प्रमुख मांगें शामिल हैं।महासंघ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं एवं सुपरवाइजरों की लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान कराया जाए तथा उनकी न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इन महिला कर्मियों को राहत प्रदान की जाए।







