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बॉडी निर्माण से पहले बस पंजीयन का मामला: जयपुर जांच के बाद उठे सवाल, नीमच आरटीओ ने कहा- नियमों के तहत हुआ रजिस्ट्रेशन

Mahendra Upadhyay
4 Min Read
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। यात्री सुरक्षा और वाहन पंजीयन प्रक्रिया से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हलचल मच गई है। राजस्थान के जयपुर स्थित एक बस बॉडी निर्माण कारखाने में परिवहन विभाग की जांच के दौरान ऐसी बस मिलने का मामला सामने आया है, जिसका पंजीयन मध्यप्रदेश के नीमच आरटीओ कार्यालय में पहले से किए जाने की बात सामने आई है। मामले को लेकर जांच के निर्देश दिए गए हैं, वहीं नीमच आरटीओ ने पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक बताते हुए वायरल दावों का खंडन किया है।जानकारी के अनुसार जयपुर के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत के निर्देश पर परिवहन विभाग की टीम ने आमेर क्षेत्र स्थित एक बस बॉडी निर्माण इकाई में निरीक्षण किया। जांच के दौरान निर्माणाधीन स्थिति में खड़ी बसों को लेकर दस्तावेजों की पड़ताल की गई। प्रारंभिक स्तर पर यह बात सामने आई कि इनमें से एक बस का पंजीयन मध्यप्रदेश के नीमच आरटीओ कार्यालय में किया गया था।परिवहन नियमों के अनुसार किसी भी बस या वाणिज्यिक वाहन का पंजीयन निर्धारित तकनीकी मानकों, आवश्यक प्रमाण-पत्रों तथा वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाता है। यात्री वाहनों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य माना गया है। इसी कारण जांच के दौरान मिले तथ्यों के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की है। जयपुर आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित वाहन स्वामी, निर्माण इकाई संचालक अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और एफआईआर तक दर्ज की जा सकती है।इधर सोशल मीडिया पर वायरल खबरों में दावा किया गया कि बस क्रमांक MP-44-ZG-9465 एवं MP-44-ZG-9665 का करीब 15 दिन पूर्व नीमच आरटीओ में पंजीयन किया गया था और बाद में दोनों बसें जयपुर में निर्माणाधीन हालत में मिलीं। इसके आधार पर बिना भौतिक निरीक्षण के पंजीयन किए जाने की आशंका जताई गई।
हालांकि नीमच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एन.एल. गामड़ ने वायरल खबर में किए जा रहे कई दावों को तथ्यों से परे बताया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी पूरी तरह सही नहीं है। उनके अनुसार नीमच आरटीओ कार्यालय में केवल बस क्रमांक MP-44-ZG-9465 का ही पंजीयन किया गया है, जबकि दूसरी बस का पंजीयन नीमच में नहीं हुआ है।आरटीओ गामड़ ने कहा कि संबंधित बस का पंजीयन निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए किया गया है।सागर मंथन उन्होंने बताया कि किसी भी बस के पंजीयन से पूर्व बॉडी निर्माता संस्था द्वारा आवश्यक प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार पंजीयन की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं और वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।सागर मंथन फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। एक ओर जयपुर परिवहन विभाग जांच के आधार पर तथ्यों की पुष्टि कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नीमच आरटीओ ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई को पूरी तरह नियमानुसार बताया है।

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