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वर्षीतप आराधकों का भव्य बहुमान: गौतममुनिजी म.सा. के सानिध्य में गूंजा दिवाकर भवन

Mahendra Upadhyay
2 Min Read
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नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। शहर के दिवाकर भवन में श्रद्धा, साधना और सम्मान का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब श्रमणसंघीय जैन दिवाकरीय परंपरा के अंतर्गत वर्षीतप आराधकों का भव्य बहुमान समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन परम पूज्य उपाध्याय प्रवर गुरुदेव डॉ. श्री गौतममुनिजी म.सा. ‘प्रथम’ के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान प्रवचन सभा में उपस्थित जनसमूह के समक्ष वर्षीतप करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मेवाड़ रत्न, आगमज्ञाता एवं सेवाभावी संत श्री वैभवमुनिजी म.सा. की 17 वर्षों से निरंतर चल रही वर्षीतप साधना विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनकी इस कठोर तपस्या के प्रति श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था व्यक्त करते हुए शत-शत वंदन एवं नमन किया।इसके पश्चात श्रीसंघ द्वारा कुल 11 वर्षीतप आराधकों का शाल, माला एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। उपवास के माध्यम से वर्षीतप की आराधना करने वालों में पंकज कुमार भण्डारी एवं ममता भण्डारी (सजोड़े), सुश्री प्रियल पोरवाल, अमिता नाहर, सविता बाबेल, सुषमा पामेचा एवं क्रिष्ण नाबेड़ा शामिल रहे। वहीं एकासन के माध्यम से वर्षीतप करने वालों में सुनीलकुमार सुराना एवं रेणु सुराना (सजोड़े), प्रीति सुराना तथा किरण चौहान का बहुमान किया गया।कार्यक्रम में श्रीसंघ के पदाधिकारी, वरिष्ठजन, महिला पदाधिकारी एवं तपस्वी महिलाओं ने सभी आराधकों का सम्मान कर उनकी साधना की अनुमोदना की। पूरे समारोह के दौरान वातावरण धर्ममय और भावपूर्ण बना रहा।इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तप, संयम और त्याग की इस परंपरा को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की जानकारी श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमच के अध्यक्ष मनोहरलाल (शम्भू) बम्ब द्वारा दी गई।

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