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44 प्रस्तावों पर लगी मुहर, नामांतरण प्रस्ताव पर गरमाया सदन,दूषित पेयजल,सफाई,कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर करोड़ों के विकास कार्यों को मिली मंजूरी,नामकरण पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

Mahendra Upadhyay
5 Min Read
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। नगर पालिका परिषद का विशेष सम्मेलन बुधवार को हंगामे,तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के बीच संपन्न हुआ।करीब 2 घंटे से अधिक चली बैठक में कुल 44 प्रस्तावों पर चर्चा हुई और अंततः सभी प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिए गए। हालांकि बैठक का सबसे विवादित मुद्दा प्रस्ताव क्रमांक-44 के अंतर्गत नामांतरण (लीज नवीनीकरण) से जुड़े 94 प्रकरण का रहा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद आमने-सामने आ गए। बहस इतनी तीखी हो गई कि मत विभाजन तक की नौबत आ गई और अंततः प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। इस दौरान भाजपा के पांच पार्षदों ने भी इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई।बैठक की शुरुआत में विपक्षी पार्षदों ने शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति, अनियमित जल वितरण और जल संकट का मुद्दा उठाते हुए नगर पालिका प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। मुख्य नगर पालिका अधिकारी दुर्गा बामनिया ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की और सुधार के प्रयासों की जानकारी दी।इसके बाद सफाई व्यवस्था को लेकर सदन में तीखी चर्चा हुई। पार्षद भारत अहीर, हरगोविंद दीवान सहित कई सदस्यों ने शहर में सफाई कर्मचारियों की कमी, कचरा वाहनों के अभाव तथा बिगड़ती सफाई व्यवस्था पर प्रशासन को घेरा। वहीं वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद ने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।

*कर्मचारियों की सेवाओं को मिली मंजूरी*

परिषद ने कार्यालयीन कार्यों के लिए 20 संविदा कम्प्यूटर ऑपरेटरों को 11 माह, स्वास्थ्य शाखा में कार्यरत 40 और 330 अस्थायी जनसेवकों को 89-89 दिन, मृत मवेशी उठाने वाले श्रमिकों, तरण पुष्कर संचालन के कर्मचारियों, वाहन चालकों, हेल्परों, दैनिक श्रमिकों तथा विभिन्न शाखाओं के संविदा कर्मचारियों की सेवाएं आगे जारी रखने के प्रस्तावों को मंजूरी दी। साथ ही जलप्रदाय शाखा, उद्यान शाखा, कार्यशाला शाखा तथा अन्य विभागों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भी स्वीकृत किए गए।

*विकास कार्यों को मिली हरी झंडी*

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ई-निविदा, ईडब्ल्यूएस भवनों के आवंटन, 576 आवासों की डीपीआर, विभिन्न वार्डों में सीसी रोड, नाली निर्माण, सड़क निर्माण, आश्रय निधि से विकास कार्यों सहित करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।
इसके अलावा सीताराम जाजू सागर एवं शिवाजी सागर डेम पर इंटेकवेल, हिंगोरिया फिल्टर प्लांट के संचालन, नगर में घूमने वाले श्वानों की नसबंदी, इंदिरा स्टेडियम निर्माण तथा लाइस पार्क के विकास संबंधी प्रस्तावों को भी परिषद ने मंजूरी दी।

*नामकरण के प्रस्तावों पर भी हुई लंबी बहस*
बैठक में शहर के विभिन्न मार्गों, चौराहों, उद्यानों और भवनों के नामकरण से जुड़े कई प्रस्ताव भी रखे गए। इनमें अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा स्थापना, विभिन्न मार्गों का नामकरण, श्यामाप्रसाद मुखर्जी वाटिका, महाराज श्री दक्ष प्रजापति मार्ग, गोधाम बालाजी मार्ग, टंट्या भील के नाम पर भवन का नामकरण सहित अन्य प्रस्ताव शामिल रहे।
इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षद अरुण प्रजापति सहित कई सदस्यों ने जाति और समाज विशेष के आधार पर नामकरण का विरोध करते हुए सार्वजनिक स्थलों का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, राष्ट्रनिर्माताओं और सर्वमान्य महापुरुषों के नाम पर रखने की मांग की। इस विषय पर सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए।बादमे भाजपा जिला अध्य्क्ष वंदना खण्डेलवाल,व विधायक प्रतिनिधि हेमंत हरित की समझाइश के बाद भाजपा पार्षदों ने स्वीकृति प्रदान की

*नामांतरण प्रस्ताव पर मचा सबसे बड़ा विवाद*

सम्मेलन के अंतिम चरण में प्रस्ताव क्रमांक-44 प्रस्तुत किया गया, जिसमें नगर पालिका परिषद की विभिन्न योजनाओं में आवंटित भूखंडों की पट्टानामा अवधि समाप्त होने पर मध्यप्रदेश नगरपालिका (अचल संपत्ति का अंतरण) नियम-2016 के नियम-17 के तहत 114 लीज नवीनीकरण (नामांतरण) प्रकरणों को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया।
इस प्रस्ताव के अनुक्रमांक-94 पर विपक्षी पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए इसकी प्रक्रिया और पात्रता पर सवाल उठाए तथा पुनर्विचार की मांग की। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नोकझोंक और हंगामे के बाद अध्यक्ष ने मत विभाजन कराया। मतदान में प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया,लेकिन भाजपा के पांच पार्षदों ने भी इस बिंदु पर अलग राय रखते हुए पुनर्विचार की आवश्यकता बताई।विशेष सम्मेलन में कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखने, विकास कार्यों, आवास योजनाओं, सड़क-नाली निर्माण, जलप्रदाय, नामकरण और नामांतरण सहित कुल 44 प्रस्तावों को अंततः परिषद की मंजूरी मिल गई, लेकिन नामांतरण प्रस्ताव पर हुआ विवाद पूरे सम्मेलन का सबसे चर्चित विषय बन गया।

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