नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।शहर के केंट क्षेत्र स्थित सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इन दिनों कक्षाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि इच्छुक नए विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है, वहीं वर्तमान विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इस स्थिति का सबसे अधिक असर निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जो बेहतर शिक्षा के लिए इस विद्यालय में प्रवेश लेना चाहते हैं।विद्यालय वर्ष 2022-23 से राज्य शासन की महत्वाकांक्षी सीएम राइज (वर्तमान में सांदीपनि) योजना के तहत संचालित हो रहा है, जहां कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा प्रदान की जाती है। वर्तमान में यहां 800 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। शासन के निर्धारित मानकों के अनुसार विद्यालय में कुल 57 कक्षों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 24 कक्ष ही उपलब्ध हैं। ऐसे में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर दबाव बना हुआ है।कक्षों की कमी के चलते विद्यालय प्रबंधन को प्रयोगशाला, पुस्तकालय और यहां तक कि कॉरिडोर में भी अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों के अध्ययन में बाधा उत्पन्न हो रही है,बल्कि प्रयोगशाला और पुस्तकालय जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का समुचित उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कक्षा 6 से 10 तक की अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं बंद करनी पड़ी हैं। इसके अलावा केजी-1 और केजी-2 की कक्षाएं भी प्रारंभ नहीं हो सकी हैं। वहीं हायर सेकेंडरी स्तर पर नए विषय शुरू करने की योजना भी कक्षों के अभाव में अटकी हुई है।विद्यालय में उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण, बेहतर परीक्षा परिणाम और सह-शैक्षणिक गतिविधियों के कारण अभिभावकों में इस विद्यालय को लेकर विशेष आकर्षण है। वर्तमान सत्र में ही 200 से अधिक प्रवेश आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन स्थान के अभाव में नए विद्यार्थियों को प्रवेश देना संभव नहीं हो पा रहा है।ऐसी स्थिति में विद्यालय में कम से कम 6 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों को अवसर मिल सकेगा, बल्कि वर्तमान विद्यार्थियों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस दिशा में नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार और नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा से सार्थक पहल की अपेक्षा की जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि नगरपालिका में उपलब्ध शिक्षा उपकर की राशि का उपयोग कर अस्थायी रूप से कक्ष निर्माण किया जा सकता है। चूंकि विद्यालय के नवीन भवन निर्माण में अभी समय लगेगा, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और उन्हें आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल सकें।







