नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच एक दिव्यांग व्यक्ति की आजीविका का संकट गहरा गया है। जनसुनवाई में पहुंचे ज्ञानप्रकाश खण्डेलवाल ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए अपनी मार्मिक व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं और मेहनत-मजदूरी जैसे कार्य करने में असमर्थ हैं। ऐसे में उन्होंने सीआरपीएफ रोड पर एक छोटी सी अस्थायी चाय की गुमटी लगाकर अपने परिवार के भरण-पोषण का साधन बनाया था।ज्ञानप्रकाश के अनुसार इसी गुमटी से उनकी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई-लिखाई तथा घर का खर्च चलता था। लेकिन हाल ही में चले अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उनकी गुमटी भी हटा दी गई, जिससे उनका एकमात्र आय स्रोत समाप्त हो गया। इसके बाद से उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है।पीड़ित का कहना है कि अभियान के दौरान हटाई गई अन्य गुमटियां दोबारा अपने स्थान पर लग चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब तक अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई और तीन बार कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर भी अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।ज्ञानप्रकाश ने अपनी दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें दोबारा गुमटी लगाने की अनुमति मिल जाती है, तो वे अपने परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकेंगे और बच्चों की पढ़ाई भी जारी रख पाएंगे।







