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सात फेरों का वचन भूला पति: भीषण गर्मी में छत पर कंकाल बन चुकी पत्नी,टीम ने किया रेस्क्यू पहुचाया अस्पताल,4 साल से दुनिया की नजरों से थी ओझल

Mahendra Upadhyay
3 Min Read
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नीमच।महेन्द्र उपाध्याय।सिटी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर भगवानपुर चौराहे से गुरुवार को सामने आया एक मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। भीषण गर्मी के बीच एक महिला को उसके ही पति द्वारा छत पर लाचार अवस्था में छोड़ दिया गया, जहां वह धीरे-धीरे कंकाल में तब्दील हो चुकी थी। भूख और प्यास से तड़पती उस महिला की हालत देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया और मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।पड़ोसियों ने बताया कि सीमा पति अजीत सोनी (उम्र लगभग 40 वर्ष) पहले बेहद व्यवहारिक, सुंदर और सुशील महिला थी।लेकिन पिछले तीन से चार वर्षों से वह आसपास के लोगों को दिखाई नहीं दी। किसी को अंदेशा नहीं था कि वह इतनी भयावह स्थिति में जीवन गुजार रही है।इस अमानवीय स्थिति का खुलासा तब हुआ, जब किसी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आते ही नीमच सिटी पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। बिना समय गंवाए टीम मौके पर पहुंची।जब अधिकारी छत पर पहुंचे तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। तेज धूप में एक चादर में लिपटी महिला हड्डियों का ढांचा बन चुकी थी। जैसे ही अधिकारियों ने उसे आवाज दी,उसके मुंह से जो पहला शब्द निकला, वह था—“मुझे खाना दे दो…”। यह सुनते ही वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू आ गए।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल महिला का रेस्क्यू किया और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, महिला लंबे समय से कुपोषण और उपेक्षा का शिकार रही है।यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब एक पति सात फेरे लेकर पत्नी को घर लाता है, तो वह सातों वचनों को निभाने का संकल्प भी लेता है। लेकिन यहां जिस तरह से एक पत्नी को इस हालत में छोड़ दिया गया, वह न केवल रिश्तों की मर्यादा को तोड़ता है, बल्कि इंसानियत पर भी सवाल खड़ा करता है।फिलहाल प्रशासन मामले की जांच में जुटा है और महिला के बेहतर उपचार व पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। यह घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर रिश्तों की जिम्मेदारी और मानवता का मूल्य आज कहां खोता जा रहा है।

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