नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कुछ लोग अपने आप को अल्पसंख्यक बताते हुए समाज में जिहादी मानसिकता का बीजारोपण कर रहे हैं, लेकिन संत समाज उन्हें सफल नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि हाल के समय में देश के पर्यटक स्थलों पर धर्म पूछकर किए गए हमलों ने यह साबित किया है कि आतंकवाद की मानसिकता का एक विशेष स्वरूप होता है।विहिप के विभाग मंत्री अनुपाल सिंह झाला ने बताया कि आलोक कुमार मंदसौर-नीमच विभाग के दौरे पर आए थे,जहां उन्होंने मंदसौर में आयोजित अर्चक-पुरोहित सम्मेलन में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने संतों, अर्चकों और पुरोहितों से समाज जागरण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विहिप का कार्य संतों और मठ-मंदिरों से संपर्क स्थापित करना है, जबकि समाज को जागृत करने का दायित्व संत समाज का है।आलोक कुमार ने कहा कि हिंदू धर्म, संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए संतों का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज के विभिन्न मत, पंथ और संप्रदाय भले ही अलग-अलग विचार रखते हों,लेकिन उनका लक्ष्य एक ही है। समाज में एकता स्थापित कर विघटनकारी ताकतों का करारा जवाब दिया जा सकता है।उन्होंने धर्मांतरण को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसका मुकाबला एकजुटता से ही संभव है।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिहादी मानसिकता केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसके खिलाफ वैचारिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर कठोर प्रतिरोध आवश्यक है।मंदिरों के सरकारी प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों को सरकारी अधिग्रहण से मुक्त कराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समुदाय विशेष सुविधाओं और अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं तथा जनसंख्या असंतुलन धर्मांतरण और घुसपैठ के कारण भी बढ़ रहा है।सम्मेलन के दौरान संत मिथिलेश नागर, प्रांत संगठन मंत्री खगेन्द्र भार्गव, दिलीप जैन, सत्यनारायण राठौर सहित अन्य संतों और पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। इस आयोजन में लगभग 650 संत, अर्चक और पुरोहित शामिल हुए। कार्यक्रम के पश्चात सहभोज एवं विभागीय बैठक दो सत्रों में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







