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जिला जेल नीमच में गूंजा नशा मुक्ति का संदेश, गायत्री परिवार ने बंदियों को दी नई दिशा

Mahendra Upadhyay
2 Min Read

नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। गायत्री परिवार द्वारा जिला जेल नीमच में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बंदियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करना रहा।इस अवसर पर गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य अशोक सिंहल ने परम पूज्य गुरुदेव का दिव्य संदेश सुनाते हुए मानव जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया” — अर्थात जीवन का सबसे बड़ा सुख स्वस्थ शरीर है। उन्होंने बंदियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को पूर्णतः नशा और अन्य व्यसनों से मुक्त बनाएं, तभी वास्तविक सुख और शांति प्राप्त हो सकती है।कार्यक्रम में कमल एरन ने संत तुलसीदास द्वारा रचित प्रसिद्ध पंक्ति “बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा” की व्याख्या करते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य है। सागर मंथन इसे व्यर्थ न गँवाकर प्रत्येक व्यक्ति को अपने चिंतन, चरित्र और व्यवहार को श्रेष्ठ बनाना चाहिए। उन्होंने आत्म चिंतन, आत्म सुधार,सागर मंथन आत्म निर्माण और आत्म विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बंदियों को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के प्रारंभ में युवा अशोक धाकड़ एवं दीपक अहीर ने प्रेरणास्पद युग संगीत प्रस्तुत कर वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित बंदियों के मन में नई आशा और उत्साह का संचार किया।कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती मंजुला शर्मा ने जिला जेल अधीक्षक, जेल स्टाफ,बंदियों एवं गायत्री परिवार के सभी कार्यकर्ताओं सागर मंथन का आभार व्यक्त करते हुए सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान गायत्री परिवार की ओर से बंदियों को अखंड ज्योति पत्रिका, मंत्र लेखन सामग्री एवं सद्वाक्य वाले पोस्टर भी भेंट किए गए।कार्यक्रम के अंत में जिला जेल अधीक्षक ने गायत्री परिवार का आभार व्यक्त किया।

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