नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।राजस्व न्यायालयों से पक्ष में निर्णय मिलने और अपील खारिज होने के बावजूद कृषि भूमि का कब्जा नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। जावद तहसील के ग्राम खोर निवासी केशुराम पिता दोला ने कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालय के आदेशों का पालन कराते हुए भूमि की कब्जा सुपुर्दगी दिलाने की मांग की है आवेदन के अनुसार किसान केशुराम चमार ने अपनी कृषि भूमि सर्वे क्रमांक 614/16, रकबा 1.432 हेक्टेयर पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत करते हुए राजस्व न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के बाद तहसीलदार जावद ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 250 के तहत भूमि पर अवैध कब्जा होना सिद्ध माना और संबंधित अनावेदकों से भूमि का कब्जा हटाकर आवेदक को दिलाने के आदेश जारी किए थे।बताया गया है कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अनावेदकों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जावद के समक्ष अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीमांकन रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया। इसके बाद यह माना गया कि विवादित भूमि पर अवैध कब्जे की स्थिति स्पष्ट रूप से सिद्ध है तथा अधीनस्थ न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत आदेश पारित किया गया है।अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि तहसीलदार द्वारा पारित निर्णय में हस्तक्षेप किए जाने का कोई आधार नहीं है। परिणामस्वरूप अपील को निरस्त कर मूल आदेश को यथावत रखा गया। इसके साथ ही भूमि पर कब्जा दिलाने संबंधी आदेश को अंतिम रूप से बरकरार रखा गया।इसके बावजूद आवेदक का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी उसे उसकी भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है। न्यायालयों के आदेश होने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं होने से वह लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है।कलेक्टर जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में केशुराम ने मांग की है कि तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी द्वारा पारित आदेशों का तत्काल पालन कराया जाए तथा संबंधित भूमि का कब्जा उन्हें सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय से फैसला मिलने के बाद भी यदि आदेशों का क्रियान्वयन नहीं होता है तो आम व्यक्ति का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ सकता है।







