नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। आधुनिकता और वैज्ञानिक सोच के इस दौर में भी कई पारंपरिक मान्यताएं समाज में आज तक जीवित हैं। ऐसा ही एक दृश्य शुक्रवार को जिला चिकित्सालय परिसर के बाहर देखने को मिला, जहां एक महिला की मृत्यु के बाद उसके परिजन उसकी आत्मा को ‘ज्योत’ के रूप में विधि-विधान से अपने साथ ले जाते नजर आए। यह घटना क्षेत्र में प्रचलित उन मान्यताओं को दर्शाती है, जिनका पालन आज भी कई परिवार परंपरा के रूप में करते हैं।जानकारी के अनुसार, मनासा तहसील के खड़ी आत्री गांव निवासी 37 वर्षीय लाली बाई मालवी लंबे समय से मुंह के कैंसर से पीड़ित थीं। उनका इलाज अहमदाबाद में चल रहा था,जहाँ से छुट्टी के बाद जब उनकी तबीयत बिगडी तो उन्हें नीमच जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया,जहां गुरुवार को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। अंतिम संस्कार के बाद शुक्रवार को परिजन पुनः जिला अस्पताल पहुंचे।परिजनों ने परंपरा के अनुसार पंडित के मार्गदर्शन में विधिवत पूजा-अर्चना कर मृतिका की आत्मा का आवाहन किया और उसे ‘ज्योत’ के रूप में अपने साथ घर ले गए। बताया गया कि आगामी 12 दिनों तक घर पर धार्मिक अनुष्ठान और विधि-विधान किए जाएंगे। सागर मंथन स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी नीमच सहित मध्य प्रदेश,राजस्थान और अन्य क्षेत्रों से लोग इस प्रकार की परंपराओं का निर्वहन करने यहां पहुंचते रहे हैं। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से मृत आत्मा को शांति मिलती है और परिवारजन धार्मिक रीति-रिवाजों के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। सागर मंथन हालांकि, बदलते समय में जहां एक ओर विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा ने जीवन को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की परंपराएं समाज के एक वर्ग में अब भी गहरी आस्था के साथ जुड़ी हुई हैं। यह घटना सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के उस पहलू को सामने लाती है,जहां परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलते दिखाई देते हैं।सागर मंथन की ओर से यह स्पष्ट किया जाता है कि इस खबर के प्रकाशन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की रूढ़िवादी परंपराओं को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि समाज में प्रचलित मान्यताओं और घटनाओं की तथ्यात्मक जानकारी साझा करना है, जिन्हें आज भी कई लोग अपनी आस्था और परंपरा के रूप में निभा रहे हैं।







