नीमच। महेंद्र उपाध्याय। ईसाई समाज द्वारा पुनरुत्थान पर्व के अंतर्गत खजूर रविवार के अवसर पर शहर में भव्य खजूर जुलूस निकाला गया। यह जुलूस आस्था, श्रद्धा और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसमें बड़ी संख्या में ईसाई समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे हाथों में खजूर की डालियां लिए शामिल हुए।खजूर जुलूस की शुरुआत आशीष भवन चर्च से हुई। जुलूस निर्धारित मार्ग से होते हुए दशहरा मैदान, विजय टॉकीज चौराहा, भारत माता चौराहा (40 नंबर), पुस्तक बाजार और जाजू बिल्डिंग मार्ग से गुजरते हुए पुनः आशीष भवन चर्च पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालु प्रभु यीशु मसीह के भजनों और प्रार्थनाओं के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।सागर मंथन इस अवसर पर आशीष भवन चर्च के पास्टर विनोद मईड़ा ने सागर मंथन को जानकारी देते हुए बताया कि खजूर रविवार ईसाई धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जब प्रभु यीशु मसीह का यरूशलेम (यदु सेलम) में उनके अनुयायियों द्वारा राजा के रूप में स्वागत किया गया था। उस समय लोगों ने उनके स्वागत में खजूर की डालियां हाथों में लेकर जयकारे लगाए थे। इसी परंपरा के तहत आज भी खजूर रविवार मनाया जाता है।उन्होंने बताया कि पुनरुत्थान पर्व की शुरुआत खजूर रविवार से होती है, जो आगामी 10 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान चर्च में विभिन्न धार्मिक गतिविधियां,प्रार्थना सभाएं और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सागर मंथन ,पर्व का मुख्य उद्देश्य मानव जाति के कल्याण और प्रभु यीशु के त्याग व पुनर्जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।पास्टर मईड़ा ने आगे बताया कि गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु ने मानव जाति के पापों से मुक्ति के लिए स्वयं को बलिदान किया था और तीसरे दिन वे पुनः जीवित हो गए थे, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यही कारण है कि खजूर रविवार को विजय दिवस के रूप में भी देखा जाता है।







