नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। भीषण गर्मी, तपती छत और उस पर खाट पर पड़ी एक कमजोर महिला… सूनी आंखें, कांपती आवाज और डर से भरे शब्द—“मैंने बिस्कुट खा लिए, कोई मारेगा तो नहीं?” यह दृश्य सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली सच्चाई बनकर सामने आया।यह दर्दनाक कहानी है नीमच के इंदिरा नगर निवासी सीमा की है जिसने 12 दिनों तक जिला अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। 16 अप्रैल को करीब 40 डिग्री तापमान में महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने उसे रेस्क्यू किया था। उस समय उसकी हालत बेहद नाजुक थी—कुपोषण से जर्जर शरीर, मानसिक बीमारी से टूटी हुई स्थिति और हर पल मौत का खतरा।रेस्क्यू के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को भीतर तक हिला दिया। तपती छत पर बेसहारा पड़ी सीमा न केवल शारीरिक रूप से कमजोर थी, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे डर और असुरक्षा में जी रही थी। उसकी मासूम-सी बातों में छिपा भय इस बात का संकेत था कि उसने लंबे समय तक पीड़ा और उपेक्षा झेली है।जिला चिकित्सालय नीमच में लगातार उपचार, दवाइयों और देखभाल के बाद अब उसकी हालत में सुधार हुआ है।सागर मंथन मंगलवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर उज्जैन जिले के ग्राम अंबोदिया स्थित सेवा धाम भेजा गया, जहां अब उसका विशेष उपचार और समुचित देखभाल की जाएगी।महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी दीपिका नामदेव ने सागर मंथन को बताया कि सीमा लंबे समय से बीमार थी।फिलहाल इस मामले में दो पहलू सामने आए हैं—एक ओर प्रताड़ना और उपेक्षा के आरोप,तो दूसरी ओर पति अजीत सोनी द्वारा बीमारी का दावा। सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।लेकिन इन सबके बीच राहत की बात यह है कि सीमा अब सुरक्षित है। सेवा धाम में उसे न सिर्फ इलाज मिलेगा, बल्कि एक नई जिंदगी की उम्मीद भी… जहां डर नहीं,बल्कि देखभाल और सम्मान उसका इंतजार कर रहे हैं।







