नीमच।महेन्द्र उपाध्याय।जिले में मोगिया समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समाज के लोगों का आरोप है कि जहां प्रदेश के अन्य जिलों में प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है,वहीं केवल नीमच जिले में अनावश्यक अड़चनें खड़ी की जा रही हैं।सागर मंथन को प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोगिया समाज अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आता है और इस संबंध में शासन तथा न्यायालय द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। न्यायालय के आदेशों में यह भी उल्लेख है कि जिन परिवारों में माता-पिता, भाई-बहन के जाति प्रमाण पत्र पहले से बने हुए हैं, उन मामलों में पुनः जांच की आवश्यकता नहीं है और आवेदक को सीधे प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा इन आदेशों का पालन नहीं किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। समाज के लोगों का कहना है कि तहसील और संबंधित विभागों में आवेदन करने के बाद भी उन्हें बार-बार जांच और दस्तावेजों के नाम पर परेशान किया जा रहा है। कई मामलों में फाइलों को लंबित रखकर आवेदकों को महीनों तक चक्कर कटवाए जा रहे हैं।समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है कि मोगिया जाति के नाम में ‘मोघिया’ का अंतर जबरन लागू किया जा रहा है,जिससे पात्र लोगों को प्रमाण पत्र देने में बाधा उत्पन्न हो रही है।उनका कहना है कि यह भेदभावपूर्ण रवैया है और इससे समाज के लोगों को शासकीय योजनाओं व सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि जिन घरों में माता-पिता और भाई बहनों के प्रमाण पत्र पूर्व में जारी किए जा चुके हैं उन घरों में अब उनके बच्चो के प्रमाण पत्र बनने में भी समस्या आ रही है। इस पूरे मामले को लेकर समाजजन ने कलेक्टर के नाम मांग पत्र सौंपते हुए मांग की है कि न्यायालय और शासन के स्पष्ट आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों द्वारा आदेशों की अवहेलना की जा रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।







