नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।नीमच से सिंगोली तक बन रही करीब 85 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों राहत के बजाय लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गई है। युद्ध जैसे वैश्विक हालातों के चलते डामर की कमी ने निर्माण कार्य की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे यह परियोजना अब आमजन के लिए मुसीबत बनती जा रही है। अधूरी सड़क, उखड़ी सतह और जगह-जगह गिट्टी बिछी होने से हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।स्थिति यह है कि पहले जहां यह सफर डेढ़ से दो घंटे में पूरा हो जाता था, वहीं अब लोगों को तीन से चार घंटे तक का समय लग रहा है। निर्माणाधीन सड़क के बड़े हिस्से को खोदकर छोड़ दिया गया है और उस पर केवल गिट्टी डाल दी गई है, जिससे वाहन फिसल रहे हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग जानलेवा साबित हो रहा है। चारपहिया वाहन और शासकीय गाड़ियां भी लगातार पंचर और खराबी का शिकार हो रही हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।मालाखेड़ा से सिंगोली तक धूल और गिट्टी का गुबार हालात को और खराब कर रहा है। इसी मार्ग पर स्थित हेरिटेज रेस्टोरेंट पर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो का अफीम तोल केंद्र संचालित हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में किसानों का आवागमन बना रहता है। खराब सड़क के चलते किसानों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।यह सड़क परियोजना मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) के तहत लगभग 295 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत है। इसमें 85.52 किलोमीटर लंबी 10 मीटर चौड़ी डामरीकृत सड़क और 133 पुल-पुलियाओं का निर्माण शामिल है। कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा जून 2027 तय की गई है।ठेकेदार कंपनी सांवरिया कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि विक्रम सिंह के अनुसार, युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण डामर की भारी कमी हो गई है, जिससे काम प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि जैसे ही डामर उपलब्ध होगा, मोरवन से डीकेन तक एक साइड का काम तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने वर्तमान असुविधा को निर्माण कार्य की सामान्य प्रक्रिया बताया।वहीं MPRDC के सहायक प्रबंधक राहुल बरडे ने भी डामर की कमी को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि सामग्री उपलब्ध होते ही काम में तेजी लाई जाएगी और फिलहाल धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव व रोलिंग कराया जा रहा है।गौरतलब है कि 30 जनवरी 2026 को कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने इस निर्माण कार्य का निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। बावजूद इसके,तीन महीने बाद भी काम की धीमी गति और अव्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।







