नीमच।महेन्द्र उपाध्याय।शुक्रवार को गांधी वाटिका में अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले भर के विभिन्न शिक्षक संगठनों के जिला अध्यक्ष,ब्लॉक अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने भाग लिया तथा शिक्षकों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित हाल ही में आए निर्णय को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अब उन शिक्षकों के लिए भी टीईटी परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है, जिन्होंने पूर्व में यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। इस फैसले से विशेष रूप से उन शिक्षकों में चिंता का माहौल है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998,2001 आदि में उस समय प्रचलित भर्ती नियमों के तहत विधिवत रूप से की गई थी।बैठक में यह भी कहा गया कि सामान्यतः कोई भी नया कानून या नियम भविष्य में लागू होता है, लेकिन वर्तमान निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) का हवाला देते हुए पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को भी इसके दायरे में शामिल किया जा रहा है, जो न्याय के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। इस विषय में शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना आवश्यक बताया गया।बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि प्रदेश स्तर के संयुक्त मोर्चा के निर्देशानुसार 8 अप्रैल 2026 को जिला स्तर पर सामूहिक धरना प्रदर्शन किया जाएगा। धरना कार्यक्रम के पश्चात नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।ज्ञापन में प्रमुख रूप से टीईटी परीक्षा के निर्णय का विरोध, नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता लागू करने की मांग तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा।बैठक की जानकारी संयुक्त मोर्चा के जिला संयोजक मनीष पुरोहित ने दी।







