नीमच।महेंद्र उपाध्याय। आस्था, सौभाग्य और अखंड सुहाग के प्रतीक गणगौर पर्व का शनिवार को शहर में श्रद्धा,परंपरा और उल्लास के साथ समापन हुआ। पिछले 16 दिनों से चल रहे इस पर्व के अंतिम दिन महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गणगौर माता को भावपूर्ण विदाई दी। सुबह से ही महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला, जहां उन्होंने पूर्ण श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती (ईशरजी-गणगौर) की पूजा की।समापन के दिन महिलाओं द्वारा गणगौर माता को गुणे और घेवर का विशेष भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात विधिपूर्वक पानी पिलाने, झाले देने तथा पारंपरिक दोहे और मंगल गीत गाने की परंपरा निभाई गई। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। 16 दिनों तक चले इस पर्व में प्रतिदिन पूजा, गीत, दोहे और विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।इसी क्रम में शहर में आयोजित गणगौर मेले और भव्य शोभायात्रा ने उत्सव को और अधिक विशेष बना दिया।माहेश्वरी भवन से प्रारंभ हुई ईशरजी-गणगौर माता की शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई दशहरा मैदान पहुंची। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी सिर पर गणगौर लेकर शामिल हुईं। ढोल-ढमाकों और लोकगीतों के बीच निकली यह यात्रा श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम बनी।दशहरा मैदान में सायंकाल 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक गणगौर मेले का आयोजन किया गया। मेले में महिलाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। यहां महिलाओं ने ईशरजी-गणगौर माता की पूजा-अर्चना कर भोग अर्पित किया और परंपरा अनुसार झाले दिए। मेले में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली।मेला संयोजक नवीन गट्टानी के अनुसार यह आयोजन लगभग 90 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है।अग्रवाल समाज एवं माहेश्वरी समाज की महिलाओं द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह मेला हर वर्ष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
पूरे शहर में गणगौर पर्व को लेकर विशेष उत्साह रहा और आस्था, भक्ति एवं परंपरा के संगम के साथ यह पर्व सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
गणगौर पर्व का श्रद्धापूर्ण समापन,भव्य शोभायात्रा और मेले में उमड़ा जनसैलाब,दिन भर चला पूजा अर्चना के दौर







