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सगराना में किसानों की एकजुटता के आगे झुका ‘कॉरपोरेट अहंकार’, गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री बैकफुट पर,जन प्रति निधि व प्रशासन ने ली ग्राम सभा की बैठक

Mahendra Upadhyay
4 Min Read

नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। जिले के सगराना गांव में प्रस्तावित गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का विरोध आखिरकार असर दिखाने लगा है। अपनी जमीन, पुश्तैनी रास्तों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीणों की अभूतपूर्व एकजुटता के सामने कंपनी का कथित ‘कॉरपोरेट अहंकार’ झुकता नजर आया। लगातार तीन दिनों से चल रहे आंदोलन के बाद शुक्रवार को प्रशासन को स्वयं गांव के खेतों में पहुंचकर ग्रामीणों के बीच बैठकर ग्राम सभा की बैठक करनी पड़ी। यह दृश्य किसी जनता अदालत से कम नहीं था, जहां ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन दोनों से तीखे सवाल किए।शुक्रवार को सगराना के खेतों में दरी पर एसडीएम संजीव साहू, सीएसपी किरण चौहान, तहसीलदार संजय मालवीय और थाना प्रभारी निलेश अवस्थी बैठे, जबकि सामने बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर पुश्तैनी रास्ते बंद करने, जमीन पर जबरन बाउंड्रीवॉल खड़ी करने और किसानों से अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।अधिकारियों की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रतिनिधियों से सवाल-जवाब हुए, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।ग्राम सरपंच रानी विक्रम सिंह सोंधिया ने स्पष्ट कहा की “गोल्ड क्रस्ट कंपनी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश था और मार्ग बाधित किया गया। हम जनप्रतिनिधि होने के नाते पूरी तरह ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। इसी कारण प्रशासन और ग्रामीणों के बीच ग्राम सभा की बैठक आयोजित कराई गई। बैठक शांतिपूर्ण चल रही थी,लेकिन कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हम चाहते हैं कि बाहरी लोग इस मामले में हस्तक्षेप न करें। हम जनप्रतिनिधि होने के नाते ग्रामीणों के साथ है।”इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि विक्रम सिंह के नेतृत्व में ‘सगराना बचाओ संघर्ष समिति’ ने 15 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन को सौंपा। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि पुश्तैनी आम रास्तों पर दीवार बनाई गई तो फैक्ट्री का काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि यदि रास्ता बदला जाता है तो पहले 30 फीट चौड़ा पक्का वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए। बिना लिखित सहमति के किसी भी किसान की जमीन पर निर्माण या अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को स्थायी नौकरी और 50 बीघा भूमि पर गौशाला निर्माण की मांग भी रखी गई।
एसडीएम संजीव साहू ने कहा, “ग्रामीणों की 12 से 13 प्रमुख मांगें सामने आई हैं, जिनमें रास्तों का सीमांकन, भूमि विवाद और भारी वाहनों की आवाजाही जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रशासन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रास्तों का सीमांकन कराया जाएगा और सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर ग्रामीणों को न्याय दिलाया जाएगा।”इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि सगराना के किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने अधिकार, सम्मान और संसाधनों से कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। तीन दिन चले इस आंदोलन ने गोल्ड क्रस्ट फैक्ट्री प्रबंधन को पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया है।

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