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सगराना में किसानों की एकजुटता के आगे झुका ‘कॉरपोरेट अहंकार’, गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री बैकफुट पर,प्रसाशन ने ली बैठक

Mahendra Upadhyay
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जिले के सगराना गांव में प्रस्तावित गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार रंग ले आया। अपनी जमीन, पुश्तैनी रास्तों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीणों की एकजुटता ने कंपनी के कथित कॉरपोरेट अहंकार को धराशायी कर दिया। पिछले तीन दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को प्रशासन को स्वयं गांव के खेतों में पहुंचकर ग्रामीणों के सामने बैठना पड़ा। यह दृश्य किसी ‘जनता अदालत’ से कम नहीं था, जहां ग्रामीणों के सवालों के आगे फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन दोनों को जवाब देना पड़ा।शुक्रवार को सगराना के खेतों में दरी पर एसडीएम संजीव साहू, सीएसपी किरण चौहान, तहसीलदार संजय मालवीय और थाना प्रभारी निलेश अवस्थी बैठे, जबकि सामने बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण मौजूद थे।ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर रास्ते बंद करने, जमीन पर जबरन बाउंड्रीवॉल बनाने और किसानों से अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।अधिकारियों की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रतिनिधियों से तीखे सवाल पूछे गए, जिनका संतोषजनक जवाब वे नहीं दे सके।
बैठक के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब ग्रामीण शौकीन मेघवाल ने सीएम हेल्पलाइन से जुड़ा मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री द्वारा उनका रास्ता रोके जाने पर जब उन्होंने न्याय के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, तो कंपनी के अधिकारी गगन तिवारी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि “क्या सरकार की हेल्पलाइन पर शिकायत करना गुनाह है?” इस घटना ने फैक्ट्री प्रबंधन के कथित तानाशाही रवैये को उजागर कर दिया।
इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि विक्रम सिंह के नेतृत्व में ‘सगराना बचाओ संघर्ष समिति’ ने 15 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन के सामने रखा। ग्रामीणों ने स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा कि पुश्तैनी आम रास्तों पर यदि दीवार खड़ी की गई तो फैक्ट्री का काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।ग्रामीणों की मांग है कि यदि रास्ता बदला जाना है तो पहले 30 फीट चौड़ा पक्का वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए। साथ ही फैक्ट्री अधिकारियों गगन तिवारी और दिनेश पांडेय पर अभद्रता और दादागिरी के आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल हटाने की मांग की गई।किसानों ने दो टूक कहा कि बिना लिखित सहमति के किसी भी किसान की जमीन का अधिग्रहण या उस पर किसी तरह का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग रखी कि गांव के प्रत्येक घर से एक सदस्य को फैक्ट्री में स्थायी नौकरी दी जाए तथा 50 बीघा भूमि पर गौशाला का निर्माण कराया जाए। किसानों का कहना था कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने संसाधनों और सम्मान की कीमत चाहते हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम संजीव साहू और सीएसपी किरण चौहान ने फैक्ट्री प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी कि कानून हाथ में लेने का प्रयास न करें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि रास्तों का सीमांकन कराया जाएगा और सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाया जाएगा। एसडीएम ने बताया कि ग्रामीणों की 12 से 13 प्रमुख मांगें सामने आई हैं, जिनमें रास्ते, भूमि विवाद और वाहनों की आवाजाही जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिन पर विचार-विमर्श जारी है। सगराना के इस आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि अब किसान विकास के नाम पर मनमानी और विनाश को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। तीन दिन चले इस घटनाक्रम ने गोल्ड क्रस्ट फैक्ट्री प्रबंधन को बैकफुट पर ला दिया है।

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