नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जमुनिया कला स्थित धानुका सोया प्लांट की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नवंबर माह में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) द्वारा किए गए निरीक्षण की जांच रिपोर्ट अब एसडीएम कार्यालय नीमच पहुंच चुकी है।
रिपोर्ट में फैक्ट्री परिसर और उसके आसपास प्रदूषण की स्पष्ट पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट के आधार पर नीमच एसडीएम संजीव साहू ने धानुका फैक्ट्री प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।यह कार्रवाई उस समय सामने आई है जब हाल ही में फैक्ट्री की जमीनी हकीकत उजागर होने के बाद महज 50 घंटे के भीतर PCB उज्जैन की तीन सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत जांच की थी। उसी जांच दल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद अब जिला प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है।एसडीएम संजीव साहू ने सागर मंथन को जानकारी देते हुए बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है।रिपोर्ट के अनुसार धानुका फैक्ट्री का जीरो वेस्ट लिक्विड डिसचार्ज सिस्टम बंद पाया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही फैक्ट्री के बाहर प्रदूषित पानी का एकत्रित होना भी दर्ज किया गया है।इन बिंदुओं को लेकर प्रदूषण मंडल ने बिंदुवार रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी है।रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन की ओर से फैक्ट्री संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।नोटिस में तय समय-सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि धानुका सोया प्लांट को स्थापित हुए लगभग 15 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, इसके बावजूद नियमों के अनुरूप पौधारोपण नहीं किया गया। पर्यावरणीय नियमों के तहत हर औद्योगिक इकाई के लिए हरित पट्टी विकसित करना अनिवार्य है, लेकिन इस दिशा में भी फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है।स्थानीय लोगों की परेशानी भी लगातार बढ़ती जा रही है। धानुका की अन्य फेक्ट्री आने वाली तेज बदबू से क्षेत्रवासी खासे परेशान हैं। बदबू और संभावित प्रदूषण को लेकर कई शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं, जिन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है। संभावित कार्रवाइयों में भारी जुर्माना,सुधारात्मक निर्देश, निर्धारित समय-सीमा में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के आदेश, उत्पादन पर अस्थायी रोक अथवा नियमों का पालन न होने की स्थिति में फैक्ट्री संचालन पर प्रतिबंध भी शामिल हो सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें फैक्ट्री प्रबंधन के जवाब पर टिकी हैं, जिसके बाद प्रशासन अगला कदम उठाएगा।







