नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। शुक्रवार, 31 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद का विशेष सम्मेलन हंगामे और नारों के बीच जंग के मैदान में तब्दील हो गया। बैठक की शुरुआत तो औपचारिकता से हुई, पर जल्द ही माहौल “मोदी-मोदी” और “छूट नहीं ये लूट है, वोट चोर गद्दी छोड़” जैसे नारों से गूंज उठा। जहां एक ओर भाजपा पार्षदों ने केंद्र सरकार के समर्थन में जोरदार नारे लगाए, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्षदों ने विरोध स्वरूप गूंजते स्वर में पलटवार किया।सम्मेलन में सबसे बड़ा घटनाक्रम तब देखने को मिला जब कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष पार्षद योगेश प्रजापति को बोलने के लिए माइक नहीं दिया गया।सागर मंथन इस पर योगेश प्रजापति और नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया के बीच तीखी बहस हो गई। सीएमओ ने माइक रखवा दिया तो नाराज नेता प्रतिपक्ष कुछ देर बाद अपना निजी माइक और लाउडस्पीकर लेकर परिषद हाल में पहुंचे और उसी पर बोलना शुरू कर दिया।इस अभूतपूर्व दृश्य से परिषद हाल में हंगामा मच गया। भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी के चलते हालात ऐसे बन गए कि माहौल सब्जी मंडी जैसा हो गया।सागर मंथन इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा बार-बार माइक से यह घोषणा करती रहीं कि “हम जनप्रतिनिधि हैं, पढ़े-लिखे और सभ्य लोग हैं, कृपया परिषद की गरिमा बनाए रखें और शांत रहकर प्रक्रिया पूरी होने दें।” लेकिन किसी ने अध्यक्ष की अपील पर ध्यान नहीं दिया। अंततः उन्हें सम्मेलन को लगभग पाँच मिनट के लिए रोकना पड़ा।शुक्रवार को आयोजित इस विशेष सम्मेलन में नगर पालिका परिषद के समक्ष चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। पहला प्रस्ताव केंद्र सरकार के “नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स” के समर्थन में था, जिस पर कांग्रेस पार्षदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि यह आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम है। इसके बावजूद भाजपा पार्षदों के बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पारित कर दिया गया।दूसरा प्रस्ताव “आत्मनिर्भर भारत संकल्प में स्वदेशी की भूमिका” को लेकर था। इस पर कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि जो लोग यह प्रस्ताव लाए हैं, पहले वे स्वयं स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें, उसके बाद ऐसे प्रस्ताव लाने की बात करें। इस पर भी भाजपा के बहुमत से प्रस्ताव पास कर दिया गया।तीसरा प्रस्ताव शनि मंदिर चौराहे से कारगिल चौराहे तक स्मार्ट पोल एवं स्ट्रीट लाइट कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति से संबंधित था, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। वहीं, चौथा प्रस्ताव नगर पालिका क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के कंसल्टेंसी कार्य हेतु न्यूनतम दर (लागत का 1%) डोसी कंसल्टेंट प्रा.लि. व एमएसपी इंटरनेशनल आईएमसी को स्वीकृति देने से संबंधित था। इस पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षदों ने आपत्ति जताई और कंसल्टेंसी के नाम स्पष्ट करने की मांग की।हालांकि, परिषद में मौजूद 23 में से 14 पार्षदों ने प्रस्ताव के पक्ष में हाथ उठाए, जिससे यह भी बहुमत से पास हो गया।सम्मेलन के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन पर एकतरफा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। योगेश प्रजापति ने कहा, “जब भी परिषद का सम्मेलन होता है, अध्यक्ष और सीएमओ मनमानी करती हैं। हमारी आवाज को दबाने की कोशिश होती है। आज जब हमने बोलने की कोशिश की तो माइक ही रखवा दिया गया, इसलिए अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मुझे निजी माइक और स्पीकर लाना पड़ा।”दूसरी ओर भाजपा पार्षदों ने कहा कि कांग्रेस केवल राजनीति कर रही है और विकास के मुद्दों पर विरोध करना उसकी आदत बन चुकी है।सागर मंथन हंगामे के बावजूद परिषद ने बहुमत से चारों प्रस्ताव पारित किए, लेकिन इस सम्मेलन ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए। शुक्रवार का यह परिषद सत्र एक बार फिर यह साबित कर गया कि नीमच नगर पालिका के सम्मेलन अब नीतिगत चर्चा से अधिक नारेबाजी और राजनीतिक टकराव का मंच बनते जा रहे हैं।







