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महिला स्वयं सहायता समूह महासंघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर,क्लेक्टर कार्यालय में किया प्रदर्शन,दुकानों के बंद होने से नागरिकों की बढ़ी परेशानी

Mahendra Upadhyay
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नीमच।महेंद्र उपाध्याय।महिला स्वयं सहायता समूह महासंघ (म.प्र.) अंतर्गत एमडीएम एवं सांझा चुल्हा रसोइया संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। सागर मंथन हड़ताल के पहले ही दिन महासंघ के सदस्य क्लेक्टर कार्यालय स्थित हनुमान मंदिर पर एकत्र हुए और जोरदार प्रदर्शन किया।हड़ताल के असर से जिले में 100 से अधिक दुकानें बंद रही, जिससे आम नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।हड़ताल में पीडीएस दुकान समूह, भंडारण संचालक एवं सेल्समैन शामिल हुए। महासंघ की प्रमुख मांग है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणा के अनुसार प्राथमिक कृषि सेवा सहकारी (फैक्स) दुकानों के सेल्समैन को 3000 रुपये अतिरिक्त मानदेय मिल रहा है, जबकि महिला स्वयं सहायता समूह की दुकानों पर भी वही कार्य सेल्समैन करते हैं। उन्हें यह लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा?सागर मंथम महासंघ ने इस भेदभाव को समाप्त कर समान मानदेय देने की मांग उठाई है।इसके अलावा समूह एवं भंडारण दुकानों से जुड़े संचालकों ने पूर्व में कटे टीडीएस कटोत्रा का भुगतान शीघ्र करने और भविष्य में टीडीएस कटोत्रा बंद करने की मांग की है। साथ ही पीडीएस दुकानों पर कार्यरत महिला सेल्समैन को पॉस मशीन से वितरण और खाद्यान्न तुलावटी दोनों कार्य एक साथ करने पड़ते हैं जो संभव नहीं है। इसलिए अतिरिक्त सहायक तुलावटी नियुक्त किए जाने की जरूरत बताई गई।महासंघ ने कहा कि वेयरहाउस से पीडीएस दुकान तक आने वाले खाद्यान्न की तुलाई के बाद वितरण के समय लगभग एक क्विंटल पर 3 किलो घटती बैठती है। ऐसे में इस कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न का आवंटन अलग से किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उपभोक्ताओं तक गुणवत्ता युक्त खाद्यान्न पहुंचे।दुकानों में खाद्यान्न की सुरक्षा हेतु नए गोदाम उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। भंडारण दुकानों का वर्तमान कमीशन 90 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग रखी गई। वहीं पॉस मशीन चार्जर, स्कैनर, बिजली बिल, स्टेशनरी और दुकान किराया जैसे खर्च भी वर्तमान में संचालकों को स्वयं उठाने पड़ते हैं महासंघ का कहना है कि शासन को इन अतिरिक्त खर्चों का भुगतान करना चाहिए।साथ ही दुकानों के नवीनीकरण की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने की मांग प्रमुख रूप से सामने आई है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।

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