नीमच।महेंद्र उपाध्याय।स्टेशन रोड स्थित रेलवे फाटक पर प्रस्तावित ओवर ब्रिज निर्माण को लेकर क्षेत्रवासियों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है।सागर मंथन क्षेत्रवासियों का कहना है कि पूर्व में स्वीकृत नक्शा सर्वे और निरीक्षण के बाद बना था, जो नागरिकों, व्यापारियों और पर्यावरण की दृष्टि से पूरी तरह उपयुक्त था। इस नक्शे के अनुरूप ब्रिज बघाना से सीधे रेलवे फाटक के ऊपर से होकर रेलवे के एक बंगले के ऊपर से गुजरते हुए पुरानी कृषि उपज मंडी की रिक्त भूमि से होता हुआ लेवड़ा मार्ग के सामने उतरता।सागर मंथन इस व्यवस्था से न तो किसी की निजी संपत्ति प्रभावित होती और न ही क्षेत्र के व्यवसायियों या रहवासियों को कोई नुकसान होता।लेकिन हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि पूर्व स्वीकृत नक्शे को बदलकर अब नया नक्शा तैयार किया गया है। इस नए प्रस्ताव के अनुसार ब्रिज को पुरानी कृषि उपज मंडी के गेट क्रमांक-2 से होकर पूरे स्टेशन रोड क्षेत्र से निकाला जाएगा।क्षेत्रवासियों ने इस बदलाव को पूरी तरह अव्यवहारिक बताया है। क्षेत्र वासियो ने सागर मंथन को बताया कि यदि नया नक्शा लागू हुआ तो स्टेशन रोड और मंडी क्षेत्र के रहवासियों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।व्यापारियों का आरोप है कि सड़क किनारे छोटे-छोटे व्यापार जैसे फल-फ्रूट, सब्जी, चाय-ठेला, फूल-माला आदि से जीवन यापन करने वाले गरीब मजदूर वर्ग का कारोबार चौपट हो जाएगा। यही नहीं, वर्तमान में स्टेशन रोड पर दुकानों के ऊपर बने मकानों में करीब 500 परिवार निवासरत हैं। नए नक्शे के अनुरूप ब्रिज बनने पर इन परिवारों के जीवन पर भी संकट आ जाएगा।पर्यावरण की दृष्टि से भी क्षेत्रवासी चिंतित हैं। उनका कहना है कि स्टेशन रोड पर सड़क किनारे लगे हरे-भरे पेड़ पौधे ब्रिज निर्माण के दौरान पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। इससे क्षेत्र की हरियाली समाप्त हो जाएगी और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ सकती है।क्षेत्रवासियों का यह भी आरोप है कि सेतु निगम के इंजीनियर और ठेकेदारों की मिलीभगत से ही नक्शे में यह बदलाव किया गया है, जिसकी जानकारी न तो स्थानीय प्रशासन को है और न ही जनप्रतिनिधियों को। इसी को लेकर बुधवार को स्टेशन रोड क्षेत्र के रहवासी और व्यापारी बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां प्रदर्शन कर सांसाद का घेराव किया और क्लेक्टर को पुराने नक्शे के आधार पर ही ब्रिज निर्माण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि पूर्व स्वीकृत नक्शे के अनुसार ब्रिज का निर्माण नहीं किया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण पूर्व स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही करवाया जाए, ताकि क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके और नागरिकों को किसी प्रकार की हानि न उठानी पड़े।







