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धानुका समूह की बड़ी लापरवाही उजागर: तीनों प्लांटों में ग्रीन बेल्ट विकास पूरी तरह गायब, हजारों पेड़ लगाने का दावा सिर्फ कागज़ों में

Mahendra Upadhyay
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जिले में स्थापित धानुका ग्रुप के तीन प्रमुख औद्योगिक प्लांट— धानुका बायोटेक, धानुका सोया और धानुका एक्सट्रैक्शन—पर पर्यावरणीय मानकों को लेकर गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। पर्यावरण अनुमति (Environmental Clearance) एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी कंडिशन्स के अनुसार हर औद्योगिक इकाई को अपनी कुल भूमि का 33 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित करना आवश्यक होता है। इसके बावजूद इन तीनों प्लांटों में ग्रीन स्पेस/ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट पूरी तरह नजरअंदाज पाया गया।

सबसे प्रमुख मामला धानुका बायोटेक से जुड़ा है। कंपनी की EC रिपोर्ट के अनुसार 2.65 हेक्टेयर के संपूर्ण क्षेत्र में से 0.8 हेक्टेयर भूमि हरियाली के लिए आरक्षित किए जाने तथा 5,300 से अधिक पौधे—जैसे नीम, अशोक, अमलताश, आंवला आदि—रोपण करने का दावा किया गया था। रिपोर्ट में विस्तृत वृक्षारोपण सूची प्रस्तुत कर इसे बड़े पैमाने पर हरित विकास का मॉडल बताया गया था।
इसी प्रकार धानुका सोया और धानुका एक्सट्रैक्शन प्लांट में भी हजारों पेड़-पौधों का रोपण और नियमित देखभाल अनिवार्य शर्तों में शामिल था। लेकिन मौके की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल उलट नजर आई। तीनों प्लांटों के परिसर में न हरियाली दिखाई दी, न ग्रीन ज़ोन, न ही किसी प्रकार का वृक्षारोपण। जिस ग्रीन बेल्ट की बात दस्तावेजों में बड़े दावों के साथ दर्ज है, वह जमीन पर कहीं मौजूद नहीं मिली।स्थानीय निरीक्षण के दौरान सीमा दीवारों, आंतरिक मार्गों, प्रोसेसिंग यूनिट क्षेत्र, CPU ज़ोन और बैकयार्ड तक हर जगह ग्रीन कवर का अभाव देखा गया। यह स्थिति औद्योगिक अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।सबसे महत्वपूर्ण खुलासा तब हुआ जब कुछ दिनों पूर्व शिकायतों की जांच करने पहुंची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की टीम ने मौके पर निरीक्षण के दौरान स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि—
“ग्रीन स्पेस डेवलपमेंट तीनों प्लांट में नहीं मिला। यह स्पष्ट कमी है।”
PCB के वरिष्ठ वैज्ञानिक का यह ऑन-रिकॉर्ड बयान वर्षों से ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही चिंताओं को सही साबित करता है।PCB टीम ने न केवल ग्रीन स्पेस उल्लंघन को अपनी रिपोर्ट में शामिल करने की बात कही, बल्कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) जैसी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन पर भी संदेह जताया।इन तीनों प्लांटों में ग्रीन बेल्ट का न होना यह दर्शाता है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन केवल कागजों में दर्शाया गया, जबकि वास्तविकता में उनकी अनदेखी होती रही। यह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि उद्योगों को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति (EC/CTO) का सीधा उल्लंघन भी है।ग्रामीणों का कहना है कि धानुका समूह द्वारा वर्षों से फैक्ट्री संचालन के नाम पर पर्यावरणीय दायित्वों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब PCB की रिपोर्ट आने के बाद उम्मीद है कि इस गंभीर लापरवाही पर कार्रवाई होगी और परिसर में वास्तविक ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए कंपनी को बाध्य किया जाएगा।

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