नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम की धज्जियां उड़ाते जमुनियाकला स्थित धानुका सोया प्लांट की जानकारी के बाद नीमच से लेकर उज्जैन तक हलचल मच गई, एक ओर जहां धानुका सोया द्वारा नियमों के पूरी तरह पालन के बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मौके पर नियमों को सिर्फ कागजों तक ही सीमित देखा गया। धरातल पर सब उलट दिखा था। नीमच के जमुनिया कला स्थित धानुका सोया के द्वारा खुले में गंदा पानी छोड़ने का मामला जानकारी मिलने के महज 50 घंटे के भीतर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड उज्जैन की तीन सदस्य टीम सोमवार दोपहर नीमच पहुंची।सागर मंथन जहां जांच दल ने फैक्ट्री से निकलने वाले दूषित व जहरीले केमिकल वाले पानी से प्रभावित हो रहे पानी के कुओं सहित गांव के तालाब और फैक्ट्री से बाहर आए नाले के पानी के सैंपल लिए।सागर मंथन वहीं किसानों के खेतों और फैक्ट्री के भीतर व बाहरी क्षेत्रों का सूक्ष्मता से जांच कर स्थानीय लोगों के बयान भी दर्ज किए। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड उज्जैन के तीन सदस्यीय टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रद्युम्न खरे, वैज्ञानिक हरिशंकर शर्मा व सैंपलिंगकर्ता मुकुट सिंह जगह जगह से एकत्र दूषित पानी के नमूने अपने साथ ले गए।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं लैबोरेटरी हेड प्रद्युम्न खरे ने बताया कि समाचार माध्यमों और शिकायतों के आधार पर क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा एक कमेटी गठित की गई जिसमे 3 सदस्यीय टीम ने आज यहां आकर यहाँ निरीक्षण किया गया। फैक्ट्री की स्वामित्व की जमीन पर पानी भरा हुआ पाया गया साथ ही एक जगह इम्प्रैशन भी मिला है। कुछ जगह के सैंपल लिए गए है जिनकी जांच उज्जैन लैब में होगी। हमारे द्वारा आज फैक्ट्री के अंदर व बाहर प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है। जल्द आगे कार्यवाही की मुख्यालय से की जाएगी। वहीं ग्रीन स्पेस डेवलपमेन्ट में प्लांटेशन नही पाया गया है, यह भी हम रिपोर्ट में सबमिट करेंगे।







