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गोवर्धन पूजा पर सजीव हुई परंपरा — गोधन सजाओ प्रतियोगिता व गायों की दौड़ ने बढ़ाया उत्सव का रंग

Mahendra Upadhyay
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नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर श्री चंद्रवंशी ग्वाला गवली समाज युवा समिति, नीमच सिटी के तत्वावधान में बुधवार, 22 अक्टूबर को परंपरागत “गोधन सजाओ प्रतियोगिता” और “गायों की दौड़” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गोपालकों ने अपनी गायों को फूलों, रंग-बिरंगे कपड़ों, घंटियों और पारंपरिक गहनों से सजाकर प्रस्तुत किया।सागर मंथन पूरा आयोजन भक्तिभाव और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।लगभग 10 से अधिक गोपालकों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक मंडल ने गायों की सुंदरता, साज-सज्जा और प्रस्तुति के आधार पर विजेताओं का चयन किया। इस वर्ष अशोक सुराह सागर मंथन की गाय ने प्रथम, जीतू सुराह की गाय ने द्वितीय और तुलसीराम पड़रिया की गाय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को समिति की ओर से खल की बोरी, प्रशस्ति पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया।समिति सदस्य ललित ग्वाला ने सागर मंथन को बताया कि यह परंपरा ग्वाला समाज की सांस्कृतिक पहचान रही है, जो कुछ समय के लिए बंद हो गई थी। समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने और गोपालकों में उत्साह जगाने के उद्देश्य से श्री चंद्रवंशी ग्वाला गवली समाज युवा समिति ने लगभग 5 से 7 वर्ष पूर्व इस आयोजन को पुनः प्रारंभ किया था, जो अब प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा पर भव्य रूप में आयोजित किया जाता है।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही “गोधन दौड़ प्रतियोगिता”, जिसमें लगभग 20 से 25 गायों ने भाग लिया।उक्त आयोजन को देखने बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और फटाको की आवाज से वातावरण गूंज उठा। बच्चों और महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।समिति पदाधिकारियों ने सागर मंथन को बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य न केवल मनोरंजन है, बल्कि समाज में पशुधन के प्रति प्रेम, संरक्षण और पारंपरिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना भी है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भव्य स्वरूप में किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपने समाज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सके।साथ ही शहर के कई मोहल्लों में भी गोपालकों ने गायों को मेहंदी, पुष्पमालाओं और आभूषणों से सजाकर पूजा-अर्चना की।पूरे दिन श्रद्धा और उत्सव का माहौल बना रहा।

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