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नीमच में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत दो दिवसीय कृषक सेमिनार का हुआ आयोजन

Mahendra Upadhyay
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नीमच।महेंद्र उपाध्याय।उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग जिला नीमच द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम) योजना के अंतर्गत दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषक सेमिनार का आयोजन बुधवार को स्थानीय टाउन हॉल स्थित अटल बिहारी वाजपेई सभागार में किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार, जावद विधायक पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा, उद्यानिकी महाविद्यालय मंदसौर के डीन डॉ. एस. तोमर, कृषि स्थाई समिति की अध्यक्ष मनीषा धाकड़ एवं कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के वैज्ञानिक डॉ. सी.पी.पचौरी,उपसंचालक उद्यानिकी विभाग अतर सिंह कन्नौजी ने संयुक्त रूप से किया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने अपने-अपने उद्बोधन दिए और किसानों को मधुमक्खी पालन तथा शहद उत्पादन के महत्व से अवगत कराया।सेमिनार के दौरान जिले के सैकड़ों किसान उपस्थित रहे। वैज्ञानिकों में डॉ.पी.एस. नरूका,डॉ.शिल्पी वर्मा, डॉ.जे.पी.सिंह,डॉ. संगत देवत,मत्स्य विभाग से वेव शाह तथा उद्योग विभाग से योगिता भटनागर सहित अन्य विशेषज्ञों ने शिरकत कर किसानों को नवीनतम तकनीक और जानकारी प्रदान की।विधायक दिलीप सिंह परिहार ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान की चिंता कर रहे हैं और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी किसानों की आय वृद्धि के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। सड़क,पानी,बिजली और खाद जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।इसी प्रकार जावद विधायक ने भी मधुमक्खी पालन को लेकर किसानों को प्रेरित किया।उपसंचालक उद्यानिकी विभाग,अतर सिंह कन्नौजी ने जानकारी देते हुए बताया कि एनबीएचएम योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में किसानों एवं युवाओं को मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही शहद उत्पादन के बाद किस तरह से उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं, उसकी भी संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि किस प्रजाति की मधुमक्खी का पालन किया जाए, किस प्रकार शहद निकाला जाए और उसका वैज्ञानिक तरीके से विपणन कैसे किया जाए—इन सभी बिंदुओं पर विशेषज्ञ किसानों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।यह कार्यशाला दो दिवसीय है, जिसमें विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक व्याख्यान, व्यवहारिक प्रशिक्षण और किसानों के साथ संवाद आयोजित किया जाएगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना और युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।इस कार्यशाला में भाग ले रहे किसानों ने भी उत्साह व्यक्त किया और कहा कि मधुमक्खी पालन जैसे नवाचार से वे अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं।

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