नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 के ऐतिहासिक खेल मैदान को संरक्षित रखने की मांग को लेकर रविवार को खेल मैदान बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों,सामाजिक संगठनों,अभिभावकों एवं जागरूक नागरिकों ने शहर के 40 नंबर चौराहे पर दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर मैदान को किसी भी अन्य उपयोग से मुक्त रखने की मांग की गई।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर के मध्य स्थित यह खेल मैदान वर्षों से विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और आम नागरिकों के लिए खेल एवं अन्य सार्वजनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी मैदान पर क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो, बास्केटबॉल, रनिंग,लॉन्ग जंप, गोला फेंक सहित विभिन्न खेलों का नियमित अभ्यास होता है। साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी यहीं किया जाता रहा है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के कार्यक्रमों के अलावा यह मैदान मॉर्निंग वॉक और अन्य सामाजिक गतिविधियों के लिए भी उपयोग में आता है।ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में इस खेल मैदान पर सीएम राइज स्कूल निर्माण की प्रक्रिया चलने की जानकारी मिली है। यदि ऐसा होता है तो शहर के खिलाड़ियों और विद्यार्थियों के पास अभ्यास के लिए कोई उपयुक्त मैदान नहीं बचेगा। खेल मैदान केवल खाली भूमि नहीं, बल्कि युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का आधार है। ऐसे में इसका अन्य उपयोग जनहित के विपरीत होगा।संघर्ष समिति ने प्रशासन से चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें खेल मैदान का किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किए जाने, इसे स्थायी रूप से खेल गतिविधियों के लिए संरक्षित घोषित करने, प्रस्तावित सीएम राइज स्कूल का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराने तथा मैदान पर खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित कर नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।धरना-प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि खेल मैदान को बचाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (शिक्षा) एवं जिला शिक्षा अधिकारी को भी प्रेषित की गई।