नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। वाल्मीकि समाज के आराध्य लोकदेवता गोगा देव जी की गोगा नवमी शनिवार को श्रद्धा,भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर में वाल्मीकि समाज की धार्मिक परंपरा के अनुरूप गोगा देव जी के पवित्र निशानों के साथ भव्य चल समारोह निकाला गया। निशान,धार्मिक झांकियां,अखाड़ा प्रदर्शन, ढोल-नगाड़े,डीजे और लाइट शो समारोह का प्रमुख आकर्षण रहे।गोगा नवमी पर निकाले जाने वाले निशान वाल्मीकि समाज की आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं। मोना पंचमी से विभिन्न स्थानों पर निशानों की स्थापना कर करीब सवा महीने तक उनकी सेवा की जाती है। इस दौरान सेवक अखंड व्रत रखते हुए नंगे पांव निशानों और गुरु गोरक्षनाथ जी की गोरखी छड़ी की सेवा करते हैं।भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।शनिवार को विभिन्न स्थानों से निशानों के साथ समाजजन चल समारोह के रूप में फवारा चोक पर एकत्रित हुए। यहां अखाड़ों के उस्तादों ओर सेवको का सम्मान किया गया। इसके बाद सभी 11 निशानों का चल समारोह फव्वारा चौक से प्रारम्भ होकर बारादरी,नया बाजार,घंटाघर तिलक मार्ग होते हुए स्कीम नंबर 9 स्थित गोगामेड़ी पहुंचा।समारोह में वाल्मीकि व्यायामशाला,वाल्मीकि अखाड़ा भवानी मंडी की झांकी सहित नरसिंह अवतार, शिव-पार्वती नृत्य और झांकियां शामिल रहीं। इंदौर के डीजे, प्रतापगढ़ के ढोल और रंग-रंगीली छबील सेवको की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। गोगामेड़ी पहुंचने पर विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए।