नीमच। महेंद्र उपाध्याय। नीमच की धरती पर शनिवार को पहली बार नागा साधुओं, अखाड़ों के संतों, मठाधीशों और गादीपतियों सहित देशभर के संत-महात्माओं का ऐसा विशाल समागम देखने को मिला,जिसने शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। 22 राज्यों से आए 500 से अधिक संत-महात्माओं की मौजूदगी में नागा साधुओं की अगुवाई में भव्य चल समारोह निकाला गया। महेश्वरी भवन से शुरू हुआ संतों का यह कारवां शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ टाउन हॉल दशहरा मैदान पहुंचा, जहां चार प्रमुख मुद्दों ‘ज्ञान, गंगा, गगन और गौ’ को लेकर राष्ट्रीय संत सम्मेलन एवं विशाल धर्मसभा आयोजित हुई।दो दिवसीय इस ऐतिहासिक संत समागम की शुरुआत 21 अगस्त को देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं के नीमच आगमन, स्वागत एवं आशीर्वचन कार्यक्रम के साथ हुई। सागर मंथन संतों का एकत्रीकरण महेश्वरी भवन समाज धर्मशाला में हुआ। शनिवार 22 अगस्त को सुबह 10 बजे नागा साधुओं, संत-महात्माओं, मठाधीशों, अखाड़ों के संतों, गादीपतियों, मंदिरों के पुजारियों, वैष्णव समाज के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भव्य चल समारोह निकाला गया।

*नागा साधुओं की अगुवाई में निकली भव्य शोभायात्रा*
चल समारोह महेश्वरी भवन से प्रारंभ होकर जैन भवन मार्ग, 40 नंबर चौराहा, टैगोर मार्ग, कमल चौक, फव्वारा चौक, बारादरी, नया बाजार, घंटाघर,सागर मंथन जाजू बिल्डिंग, पुस्तक बाजार और विजय टॉकीज चौराहा होते हुए टाउन हॉल दशहरा मैदान पहुंचा। शोभायात्रा में नागा साधुओं के साथ विभिन्न अखाड़ों के संत, मठ-मंदिरों के पुजारी, संत-महात्मा, रथ-बग्गियां और बैंड-बाजे शामिल रहे।शहर के प्रमुख मार्गों से निकले इस चल समारोह को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी मार्गों के दोनों ओर मौजूद रहे। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने संतों की शोभायात्रा का स्वागत किया। पहली बार नीमच की सड़कों पर इतनी बड़ी संख्या में नागा साधुओं और देश के विभिन्न हिस्सों से आए उच्च पदस्थ संतों की मौजूदगी शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

*‘ज्ञान, गंगा, गगन और गौ’ पर हुआ राष्ट्रीय संत सम्मेलन*

टाउन हॉल दशहरा मैदान में आयोजित राष्ट्रीय संत सम्मेलन में ‘ज्ञान, गंगा, गगन और गौ’ सागर मंथन चार प्रमुख विषय रहे। संत-महात्माओं ने सनातन ज्ञान एवं संस्कारों के प्रसार,नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण, पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण तथा गौसेवा और गौसंरक्षण को लेकर समाज में जनजागरण का संदेश दिया।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए संतों और महामंडलेश्वरों ने धर्म, संस्कृति, पर्यावरण, जल संरक्षण, गौसेवा तथा सामाजिक एकता से जुड़े विषयों पर प्रवचन दिए। संतों ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ प्रकृति, जल और गौ संरक्षण भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

*मंदिर-मठों को प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने की मांग*

राष्ट्रीय संत सम्मेलन के दौरान संतों ने देश के मंदिरों और मठों को लेकर भी अपनी मांग रखी। संतों का कहना था कि जिस प्रकार अन्य धर्मावलंबियों के धार्मिक स्थलों के संचालन में प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं होता उसी प्रकार देश के मंदिरों और मठों को भी प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से मुक्त रखा जाए।मंदिर-मठों के रखरखाव एवं संचालन का अधिकार संबंधित मंदिर-मठ समिति और पुजारी के अधीन रखने की मांग उठाई गई।

*जयघोष और नारों से गूंजा शहर*

शोभायात्रा के दौरान संतों और श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भोलेनाथ के जयघोष तथा धार्मिक नारों से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया। कई स्थानों पर संतों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। वहीं आयोजन के दौरान मंदिर-मठों को प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त करने की मांग से जुड़े नारे भी लगाए गए।आर्यावृत्त षड्दर्शन साधु मंडल भारत के प्रदेश अध्यक्ष महंत जितेंद्रदास महाराज एवं महंत अरविंदानंद सरस्वती ने बताया कि 21 अगस्त को संतों के नीमच आगमन, स्वागत एवं आशीर्वचन कार्यक्रम के बाद 22 अगस्त को भव्य चल समारोह एवं राष्ट्रीय संत सम्मेलन आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार नीमच में पहली बार इस स्तर पर नागा साधुओं, अखाड़ों के संतों, मठाधीशों और गादीपतियों सहित 22 राज्यों के संतों का एक साथ समागम हुआ।आयोजकों ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक समागम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति, ज्ञान, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा और सामाजिक एकता का व्यापक संदेश देने वाला राष्ट्रीय स्तर का संत सम्मेलन बना।