नीमच। महेंद्र उपाध्याय। हरियाली अमावस्या और सावन माह के पावन अवसर पर बुधवार को सुखानंद धाम से नीमच तक 31 वीं विशाल पैदल कांवड़ यात्रा निकाली गई। करीब 45 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर कांवड़िये नीमच पहुंचे। यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ यात्रियों का भव्य स्वागत किया। डीजे पर गूंजते भगवान भोलेनाथ के भजनों और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया।प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी जावद तहसील के पवित्र धार्मिक स्थल सुखानंद धाम से श्री शिव शंकर मठ के महंत भास्करानंद गिरि महाराज एवं उनके शिष्य महंत धर्मानंद जी महाराज के सानिध्य तथा मेघा बापू के नेतृत्व में कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा में शामिल होने के लिए मंगलवार शाम कांवड़िये बसों के माध्यम से सुखानंद धाम पहुंचे। यहां रात्रि में कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।बुधवार सुबह कांवड़ियों ने सुखानंद धाम के पवित्र कुंड से जल भरा और भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे कांवड़ यात्रा नीमच के लिए रवाना हुई। कांवड़िये जावद,सुआखेड़ा, डूंगलावदा,कनावटी,लायंस पार्क,पुस्तक बाजार,जाजू बिल्डिंग,घण्टाघर,नया बाजार,बारादरी बस स्टैंड होते हुए नीमच सिटी स्थित शिव शंकर मठ बाबा महाकाल भोलेनाथ मंदिर पहुंचे।मंदिर पहुंचने पर सुखानंद धाम से लाए गए पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।यात्रा में सबसे आगे डीजे पर भगवान भोलेनाथ के मधुर भजन बज रहे थे। भजनों की धुन पर कांवड़िये हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे थे। शहर में प्रवेश के बाद यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई।कांवड़ यात्रा में 200 से अधिक महिला, पुरुष एवं बच्चे कांवड़ियों के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा हिंदू समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी यात्रा में सहभागिता की।पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धा,भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।इस कावड़ यात्रा में 31 लीटर,51,लीटर,ओर 80 लीटर तक कि कावड़ शामिल रही।