नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।त्योहारी सीजन के बीच नीमच में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कथित अवैध बिक्री और छोटे सिलेंडरों से बड़े सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग का मामला चर्चा में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शहर में कुछ स्थानों पर छोटे सिलेंडरों से बड़े कमर्शियल सिलेंडरों में गैस भरने का काम किए जाने और बिना बिल सिलेंडरों की खरीद-फरोख्त होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।सूत्रों के मुताबिक, छोटे सिलेंडरों से बड़े सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग के लिए कथित तौर पर 2,200 से 2,500 रुपये तक लिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर टंकी सहित करीब 3,000 रुपये में उपलब्ध होने की बात भी कही जा रही है। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह जांच का विषय है कि गैस की आपूर्ति किन स्रोतों से हो रही है और संबंधित लेन-देन में बिल जारी किए जा रहे हैं या नहीं।
*होटल संचालकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बिलों की जांच जरूरी*
शहर में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग होता है। ऐसे में यह जांच करना जरूरी है कि प्रतिष्ठानों तक पहुंचने वाले सिलेंडर अधिकृत माध्यम से खरीदे जा रहे हैं या नहीं। क्या संबंधित प्रतिष्ठानों के पास खरीद के बिल उपलब्ध हैं? क्या सिलेंडरों की आपूर्ति अधिकृत गैस एजेंसियों के माध्यम से हो रही है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच से ही सामने आ सकता है।

*आपूर्ति विभाग की निगरानी पर उठ रहे सवाल*

सूत्रों के दावों के बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, विभाग को इस संबंध में औपचारिक शिकायत मिली है या नहीं और अब तक कोई कार्रवाई की गई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्रों में जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।छोटे सिलेंडरों से बड़े सिलेंडरों में गैस भरने की प्रक्रिया, यदि नियमों के विरुद्ध की जा रही है, तो इससे सुरक्षा संबंधी गंभीर जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए संभावित रिफिलिंग स्थलों, सिलेंडरों की खरीद-बिक्री और बिलों की जांच जरूरी है।

*जांच के बाद ही स्पष्ट होगी तस्वीर*

फिलहाल यह मामला सूत्रों से मिली जानकारी और उठ रहे सवालों पर आधारित है।हमारा उद्देश्य किसी विशेष होटल संचालक, व्यापारी या गैस एजेंसी के खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाना नहीं है संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नीमच में कमर्शियल सिलेंडरों की कथित ब्लैक मार्केटिंग और बिना बिल बिक्री का मामला कितना सही है।अब देखना होगा कि आपूर्ति विभाग इस जानकारी को गंभीरता से लेकर जांच करता है या नहीं और संभावित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने कब तक आती है।