नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर सोमवार से जिले सहित प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। आंदोलन के तहत पटवारियों ने अपनी-अपनी तहसीलों में एकत्र होकर तहसीलदारों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का आवेदन सौंपा और अपने शासकीय बस्ते जमा कर दिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी लंबित मांगों पर सरकार कोई ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक वे नियमित राजस्व कार्य नहीं करेंगे।मध्यप्रदेश पटवारी संघ द्वारा लंबे समय से पदोन्नति, कैडर रिव्यू सहित विभिन्न मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा था। पिछले करीब 15 दिनों से काली पट्टी बांधकर कार्य करना,सामूहिक अवकाश और अन्य विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने से भोपाल में हुई प्रांतीय बैठक में सोमवार 3 अगस्त से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया।सोमवार को जिले की विभिन्न तहसीलों में पटवारी एकत्रित हुए और तहसीलदारों को ज्ञापन एवं हड़ताल का आवेदन सौंपते हुए अपने सरकारी बस्ते जमा कर दिए। इस दौरान पटवारियों ने कहा कि वे सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत रहने के बावजूद उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है, जबकि अन्य कर्मचारी संवर्गों में समय-समय पर पदोन्नति की प्रक्रिया होती रही है।पटवारी संघ का कहना है कि कैडर रिव्यू लागू होने से पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे और सेवा संरचना में सुधार होगा। इसी कारण कैडर रिव्यू और प्रमोशन की मांग इस आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बन गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और किसी भी प्रकार के दबाव में हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों पर पड़ने की संभावना है। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, फसल गिरदावरी, भू-अभिलेख संबंधी कार्य, विभिन्न प्रमाण-पत्रों के लिए आवश्यक प्रतिवेदन, भूमि विवादों की जांच, प्राकृतिक आपदा में फसल नुकसान का सत्यापन तथा शासन की विभिन्न योजनाओं से जुड़े मैदानी सत्यापन जैसे कार्य प्रभावित हो सकते हैं। यदि हड़ताल लंबी चली तो लंबित मामलों का बैकलॉग बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया,लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। इसी कारण आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि शीघ्र वार्ता कर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा,अन्यथा अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।सोमवार से शुरू हुई इस हड़ताल के बाद अब राजस्व व्यवस्था पर इसका व्यापक असर दिखाई देने की संभावना है। आम नागरिकों के भूमि संबंधी कार्यों में भी देरी हो सकती है।