नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।लंबित मांगों को लेकर मध्यप्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में प्रदेशभर के कोटवारों की कामबंद हड़ताल जारी है। नीमच जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय के बाहर शनिवार को तीसरे दिन भी कोटवार धरने पर बैठे रहे। खास बात यह रही कि अवकाश के दिन भी कोटवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे रहे। संगठन का आरोप है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद उनकी समस्याएं सुनने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे कोटवारों में नाराजगी बढ़ रही है।प्रांतीय अध्यक्ष हरवीर सिंह यादव के आह्वान पर 22 से 28 अक्टूबर तक सात दिवसीय कामबंद हड़ताल की जा रही है। संगठन के अनुसार, नीमच जिले में करीब 700 कोटवार अपनी लंबित मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। कोटवारों की प्रमुख मांगों में उचित वेतन, स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।उज्जैन संभाग के संगठन मंत्री सोहनलाल सूर्यवंशी ने बताया कि कोटवार लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, कलेक्टर, तहसीलदार और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। वर्तमान में कोटवारों को लगभग 8 से 9 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।महंगाई के दौर में इतनी कम राशि से परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। संगठन की मांग है कि कोटवारों को स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर वेतन और अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाए।कोटवारों ने वर्दी वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन मंत्री सूर्यवंशी के अनुसार, वर्ष 2023 तक वर्दी की राशि सीधे कोटवारों के बैंक खातों में जमा की जाती थी, लेकिन अब ठेकेदारी व्यवस्था के माध्यम से वर्दी वितरित की जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि उपलब्ध कराई जा रही वर्दी का कपड़ा घटिया गुणवत्ता का है। साथ ही जूते और बेल्ट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने वर्दी वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच कराने और वर्दी की राशि पूर्व की तरह सीधे बैंक खातों में जमा करने की मांग की है।कोटवार संगठन ने स्पष्ट किया है कि 28 अक्टूबर तक हड़ताल के दौरान शांतिपूर्ण धरना देकर शासकीय कार्यों का बहिष्कार जारी रखा जाएगा। यदि निर्धारित समयसीमा तक मांगों का उचित निराकरण नहीं होता है, तो 31 अक्टूबर से भोपाल में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।कोटवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कोटवारों की मांगों पर कब तक ध्यान देता है और हड़ताल समाप्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है।