नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। लंबित मांगों को लेकर मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में प्रदेशभर के कोटवारों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रांतीय अध्यक्ष हरवीर सिंह यादव के आह्वान पर नीमच सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कोटवार 22 से 28 अक्टूबर तक सात दिवसीय कामबंद हड़ताल पर बैठ गए हैं। गुरुवार को नीमच जिला कलेक्टर कार्यालय पर भी जिलेभर के कोटवारों ने धरना शुरू कर दिया।उज्जैन संभाग के संगठन मंत्री सोहनलाल सूर्यवंशी ने बताया कि कोटवार वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, कलेक्टर, तहसीलदार और विधायकों को ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोटवारों को मात्र 8 से 9 हजार रुपये वेतन मिल रहा है। महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का पालन-पोषण करना और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। संगठन की प्रमुख मांग है कि कोटवारों को स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
*वर्दी वितरण व्यवस्था पर भी उठाए सवाल*
हड़ताल के दौरान कोटवारों ने वर्दी वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। संगठन मंत्री सूर्यवंशी के अनुसार, वर्ष 2023 तक वर्दी की राशि सीधे कोटवारों के बैंक खातों में जमा होती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था ठेकेदारी के माध्यम से संचालित की जा रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार के माध्यम से तहसीलों में भेजी गई वर्दी का कपड़ा बेहद घटिया और बेडौल है। इसके अलावा प्लास्टिक के जूते और कमजोर बेल्ट दिए जा रहे हैं, जो उपयोग के योग्य नहीं हैं। संगठन का दावा है कि प्रदेशभर के कोटवारों ने इस सामग्री का बहिष्कार करते हुए वर्दी लेने से इनकार कर दिया है।कोटवारों ने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई करने तथा वर्दी की राशि पूर्व की तरह सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की मांग की है।
*31 अक्टूबर से भोपाल में आंदोलन की चेतावनी*
संगठन के अनुसार, कोटवार 22 से 28 अक्टूबर तक शांतिपूर्ण धरना देते हुए शासकीय कार्यों का बहिष्कार करेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 28 अक्टूबर तक शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के हजारों कोटवार 31 अक्टूबर से राजधानी भोपाल में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।