नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जिले में विद्युत दुर्घटनाओं के बाद कथित तौर पर भीड़ एकत्र कर मुआवजे का दबाव बनाने, अधिकारियों-कर्मचारियों को धमकाने और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोपों को लेकर बिजली अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने बुधवार शाम जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति होने या कर्मचारियों के साथ अभद्रता और धमकी की स्थिति बनने पर बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद और मोबाइल बंद हड़ताल करने को बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में जिले की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने और ब्लैकआउट की आशंका भी जताई गई है। ज्ञापन में समिति ने जीवन सिंह शेरपुर एवं उनके कुछ सहयोगियों पर आरोप लगाया है कि जिले में विद्युत दुर्घटनाओं के दौरान मौके पर भीड़ एकत्र कर धरना-प्रदर्शन किया जाता है और विद्युत कंपनी के अधिकारियों पर नियमों से परे 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का मुआवजा तत्काल स्वीकृत करने का दबाव बनाया जाता है। समिति का आरोप है कि इस दौरान प्रशासन पर सीधे हत्या का प्रकरण दर्ज करने के लिए भी दबाव बनाया जाता है।
**अधिकारियों-कर्मचारियों को धमकाने का आरोप**
समिति ने ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विद्युत विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ाकर मारने, घर से उठा लेने, करंट लगाकर जान से मारने तथा सब-स्टेशन और विद्युत ग्रिड में आग लगाने जैसी धमकियां दिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। समिति के अनुसार, इस तरह की कथित घटनाओं के ऑडियो और वीडियो साक्ष्य सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों पर उपलब्ध हैं। समिति ने इसे शासकीय कार्य में बाधा और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
**एफआईआर पर कार्रवाई नहीं होने पर जताई नाराजगी**
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अधीक्षण यंत्री, मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, नीमच वृत्त की ओर से 7 अक्टूबर 2026 को नीमच कैंट थाने में एफआईआर क्रमांक 0525 दर्ज कराई गई थी। समिति ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अब तक ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से संबंधित तत्वों के हौसले बढ़ रहे हैं। समिति ने यह भी कहा कि यदि कोई दुर्घटना आउटसोर्स एजेंसी के कार्य अथवा कर्मचारियों से संबंधित होती है, तो उसके दायित्वों और क्षतिपूर्ति का निर्धारण संबंधित नियमों एवं अनुबंध के अनुसार किया जाना चाहिए।
**गुंडा एक्ट, रासुका और जिला बदर की मांग**
समिति ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, आगजनी और जान से मारने की कथित धमकियां देने के मामलों में जीवन सिंह शेरपुर एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध जांच कर नियमानुसार आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही ज्ञापन में गुंडा एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और जिला बदर जैसी कार्रवाई की मांग भी की गई है।इसके अलावा विद्युत व्यवस्था के संचालन एवं आपातकालीन कार्यों के दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों को पुलिस संरक्षण देने, आउटसोर्स एजेंसियों के दायित्वों के संबंध में जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने तथा विद्युत दुर्घटनाओं की निष्पक्ष जांच के बिना किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई नहीं करने की मांग उठाई गई है।बिजली अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ज्ञापन को प्रशासन के लिए अंतिम सूचना बताते हुए कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा और निर्बाध विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।