नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। हिंगोरिया फाटक के समीप जमीन विवाद को लेकर भाजपा जिला मंत्री एवं नमो ग्रुप के प्रदेश अध्यक्ष रोशन वर्मा और उनके साथियों से जुड़े मामले में अब नागदा मेनारिया ब्राह्मण समाज ने भी मोर्चा खोल दिया है। समाज ने सर्व समाज के बैनर तले दिए गए ज्ञापन में नागदा ब्राह्मण समाज के बैनर के दुरुपयोग पर आपत्ति जताते हुए एडिशनल एसपी हेमलता अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। इससे पूर्व समाज की ओर से भाजपा जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल को भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें रोशन वर्मा को पार्टी के पद से मुक्त करने की मांग की गई है। वहीं, जमीन विवाद में पक्षकार मनीष नागदा ने दावा किया है कि संबंधित भूमि भील समाज के लोगों द्वारा वसीयत के माध्यम से उनके परिवार के नाम की गई थी और इस संबंध में दस्तावेज प्रशासन एवं मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।नागदा मेनारिया ब्राह्मण समाज सेवा समिति की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि हिंगोरिया गांव में जमीन विवाद को लेकर मनीष पिता चंद्रशेखर नागदा सहित अन्य लोगों और रोशन वर्मा व उनके साथियों के बीच विवाद सामने आया था। इसके बाद सर्व समाज के नाम से दिए गए ज्ञापन में नागदा ब्राह्मण समाज के बैनर का उपयोग किया गया।समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि उक्त ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज का कोई पदाधिकारी या समाजजन मौजूद नहीं था और न ही समाज की ओर से बैनर के इस्तेमाल की सहमति दी गई थी। सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों के माध्यम से समाज को इसकी जानकारी मिली। समाज ने इसे अपने नाम और बैनर का दुरुपयोग बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस प्रकार समाज के बैनर का इस्तेमाल कर समाज में फूट डालने और लोगों के बीच आपसी विवाद पैदा करने का प्रयास किया गया। समाज ने एडिशनल एसपी हेमलता अग्रवाल से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है।इस मामले में नागदा मेनारिया ब्राह्मण समाज ने पुलिस प्रशासन के साथ संगठन स्तर पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। समाज द्वारा इससे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल को ज्ञापन सौंपकर रोशन वर्मा को उनके पद से मुक्त करने की मांग की गई है। इस मांग के बाद जमीन विवाद के साथ-साथ समाज के बैनर के कथित दुरुपयोग का मामला भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में आ गया है।जमीन विवाद को लेकर मनीष नागदा ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि संबंधित भूमि भील समाज के लोगों ने वसीयत के माध्यम से उनके परिवार के नाम की थी। उनके अनुसार, उनके पिता ने संबंधित व्यक्ति द्वारा गिरवी रखी गई भूमि को छुड़ाया था। मनीष का यह भी कहना है कि उनके परिवार ने उस व्यक्ति के अंतिम संस्कार और भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाई थी।मनीष नागदा ने दावा किया कि वसीयत के दौरान मामले से जुड़े कुछ लोगों ने भी शपथ पत्र दिए थे। जो अब रोशन वर्मा के पक्ष में खड़े है।उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि विवाद वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद रोशन वर्मा अपने राजनीतिक रसूख और पद का दुरुपयोग कर भूमि को उनके कब्जे से छुड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। मनीष ने यह भी आरोप लगाया कि गलत जानकारी देकर प्रसाशन को भ्रमित किया जा रहा है।मनीष नागदा के अनुसार, उन्होंने भूमि से संबंधित दस्तावेजों के साथ न्यायालय में चल रहे प्रकरण की छायाप्रतियां भी प्रशासन और मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायालयीन रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि भूमि विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
एक ओर नागदा मेनारिया ब्राह्मण समाज ने अपने बैनर के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष से रोशन वर्मा को पदमुक्त करने की मांग भी की गई है। जमीन विवाद में मनीष नागदा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और रोशन वर्मा का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायालयीन प्रक्रिया के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।