नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।जमीन विवाद मारपीट, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, जान से मारने की धमकी और कृषि भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों को लेकर सर्व समाज एवं पीड़ित पक्षों ने एकजुट होकर आवाज उठाई। स्वर्णकार समाज धर्मशाला से रैली निकालकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे लोगों ने एसपी प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा और संबंधित मामलों में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।ज्ञापन में हिंगोरिया फाटक क्षेत्र में 16 अक्टूबर 2026 को हुई घटना का उल्लेख करते हुए संदीप पिता रतनलाल वर्मा, मोहित पिता हेमंत गोयल, नवीन पिता गोपा कृष्ण वर्मा, राकेश पिता रामलाल साल्वी और रोशन पिता रतनलाल वर्मा सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि वे कानसिंह सिसोदिया निवासी खेताखेड़ा चारण के बताए अनुसार राजु नामक व्यक्ति की जमीन खरीदने-बेचने के सिलसिले में खेत देखने गए थे।दोपहर करीब 3 बजे बारिश होने पर वे खेत के पास पेड़ों के नीचे खड़े थे। इसी दौरान मनीष नागदा और अर्जुन नागदा वहां पहुंचे। फरियादियों का आरोप है कि बाद में वरदीचन्द नागदा और जितेंद्र नागदा भी मौके पर आए तथा रास्ते को लेकर विवाद करते हुए गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। विरोध करने पर सभी ने एकमत होकर मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं। उन्होंने जान-माल का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
**न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद धमकाने का आरोप**
दूसरे ज्ञापन में ग्राम झांझरवाड़ा-हरिपुरा निवासी गिरधारीलाल माली, बगदीराम माली और गोपाल माली ने कृषि भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का उल्लेख किया। उनका कहना है कि उन्होंने अलग-अलग वर्षों में पंजीकृत विक्रय पत्रों के माध्यम से कृषि भूमि खरीदी थी और तब से उस पर खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार, पुराने और नए सर्वे नंबरों तथा राजस्व रिकॉर्ड में कथित त्रुटियों के कारण विवाद उत्पन्न हुआ। उन्होंने मुकेश नागदा पर भूमि के दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण करवाने और उनकी जमीन पर कब्जे का प्रयास करने का आरोप लगाया।ज्ञापन के मुताबिक, 22 मई 2026 को आरोपियों ने कथित रूप से ट्रैक्टर और जेसीबी से खेत में खड़ी तिल व बाजरे की फसल, पेड़ों और खेत की बाड़ को नुकसान पहुंचाया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने और मोबाइल फोन तोड़ने का प्रयास करने के आरोप भी लगाए गए। पीड़ितों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी पुलिस और प्रशासन को आवेदन दिए गए थे। उनका दावा है कि सिविल न्यायालय ने 18 जून 2026 को प्रकरण में एकपक्षीय अस्थायी निषेधाज्ञा जारी कर वादग्रस्त संपत्ति में हस्तक्षेप करने और उसे अन्य को हस्तांतरित करने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद 17 अक्टूबर को फिर धमकियां दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
**निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग**
दोनों मामलों में ज्ञापन सौंपकर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ शिकायतों की जांच, उचित कानूनी कार्रवाई, कृषि भूमि से जुड़े विवाद का निराकरण तथा पीड़ितों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। झांझरवाड़ा के पीड़ितों ने न्यायालय के आदेश का पालन कराने और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई पर विचार करने की भी मांग रखी।