नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय,नीमच को PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित किए जाने की प्रस्तावित कार्यवाही के विरोध में गुरुवार को मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी एवं चिकित्सकों ने कलेक्टर के नाम प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल को वर्तमान शासकीय स्वरूप में ही संचालित एवं विकसित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय केवल विद्यार्थियों की चिकित्सा शिक्षा तक सीमित संस्थान नहीं है,बल्कि नीमच जिले सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इसके संचालन स्वरूप में किसी भी परिवर्तन का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा, मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ सकता है।फैकल्टी एवं चिकित्सकों ने आशंका जताई कि PPP व्यवस्था में शुल्क संरचना, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और संसाधनों के उपयोग में बदलाव की संभावना हो सकती है,जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों और मरीजों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। ज्ञापन में गरीब एवं मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए सुलभ और वहनीय उपचार की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग की गई।ज्ञापन में मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त बजट,चिकित्सकीय मानव संसाधन,नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ की पूर्ति,आवश्यक डायग्नोस्टिक सुविधाएं,दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। साथ ही विद्यार्थियों की क्लीनिकल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप एवं भविष्य की पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग के अवसरों की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया गया।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मेडिकल कॉलेज के भवन,उपकरण,मानव संसाधन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में सार्वजनिक धन का निवेश किया गया है। वर्तमान में भी विभिन्न विभागों की प्रयोगशाला एवं चिकित्सा उपकरणों से संबंधित सरकारी निविदाएं जारी होना संस्थान के शासकीय ढांचे के विकास की प्रक्रिया को दर्शाता है। ऐसे में संस्थान को और मजबूत करने के लिए सरकारी स्तर पर आवश्यक संसाधन एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।फैकल्टी एवं चिकित्सकों ने मांग की है कि PPP से संबंधित प्रस्ताव,निविदा अथवा संभावित समझौते के प्रभावों का विद्यार्थियों, चिकित्सकों,कर्मचारियों, मरीजों एवं स्थानीय नागरिकों के हितों की दृष्टि से व्यापक अध्ययन किया जाए। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों,मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों,चिकित्सकों, कर्मचारियों एवं नागरिक प्रतिनिधियों से संवाद कर उनके सुझावों और आपत्तियों पर भी विचार किया जाए।ज्ञापन के माध्यम से मेडिकल कॉलेज को PPP मोड पर संचालित किए जाने की प्रस्तावित कार्यवाही पर पुनर्विचार करने तथा कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल को पूर्णतः शासकीय स्वरूप में ही संचालित एवं विकसित करने की मांग की गई।