नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। मानदेय और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर महिला स्वयं सहायता समूह संचालकों एवं महिला रसोइयों की 21 सितंबर से शुरू हुई चौका-चूल्हा बंद हड़ताल जारी है। मंगलवार को संगठन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर समय पर भुगतान, मानदेय बढ़ाने, 10 माह के बजाय 12 माह का भुगतान सहित विभिन्न मांगें रखी गईं।महिला समूह संचालकों का कहना है कि आंगनवाड़ी, पूरक पोषण आहार और शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन के बावजूद उन्हें सीमित मानदेय और भुगतान में देरी के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने लंबित राशि तत्काल जारी करने, पोषण आहार की लागत एवं खाद्यान्न मात्रा बढ़ाने, रसोइयों को ड्रेस के लिए वार्षिक राशि देने, भोजन के बाद बच्चों की जूठी थालियां साफ करने के लिए अतिरिक्त मानदेय या सहायिका उपलब्ध कराने तथा कागजी प्रक्रिया सरल करने की मांग की है।
इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव ने बताया कि पूर्व में जारी होने वाली राशि में जुलाई का आवंटन 17 सितंबर को जिला पंचायत को प्राप्त हुआ है। भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव के कारण अब राशि एसएनए स्पर्श प्रणाली के माध्यम से खातों में भेजी जा रही है। किसी खाते की जानकारी गलत होने पर पूरा बिल अस्वीकृत होने की संभावना रहती है, इसलिए सभी खातों की जांच में पांच-छह दिन लगे।सीईओ ने बताया कि सोमवार शाम फाइल स्वीकृत कर दी गई है और मंगलवार को एसएनए स्पर्श के माध्यम से बिल आगे भेज दिए गए हैं। जिला पंचायत के अनुसार संबंधित ट्रेजरी से स्वीकृति मिलते ही जुलाई के मानदेय की राशि खातों में पहुंच जाएगी। जुलाई के खाद्यान्न की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है। वहीं अगस्त का मानदेय और खाद्यान्न अभी प्राप्त नहीं हुआ है, राशि मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।सीईओ वैष्णव ने बताया कि समूहों की ओर से दर्ज बच्चों की संख्या की तुलना में कम भोजन मिलने की समस्या बताई गई है, लेकिन इस संबंध में लिखित शिकायत नहीं दी गई है। उन्हें स्कूल में दर्ज बच्चों, प्रतिदिन उपस्थित बच्चों और भोजन प्राप्त करने वाले बच्चों का नियमित रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करने की सलाह दी गई है, ताकि निरीक्षण के दौरान व्यवस्था स्पष्ट रहे और किसी तरह की अनियमितता न मिले।वही संगठन ने मांगों के निराकरण तक हड़ताल जारी रखने की बात कही है।